हाय पैसा हाय ने बताया, लालच बुरी बला

Pauri Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। लालच वास्तव में बुरी बला है। हाय पैसा हाय ये साफ संदेश देता है। जश्न ए विरासत राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के पांचवे दिन दिल्ली के बेला थियेटर के कलाकारों ने इसकामंचन किया। हालांकि नाटक के बीच में लाइट जाने के कारण कुछ देर व्यवधान रहा। इसके अलावा, कलाकार कहीं कहीं पर ओवरएक्टिंग का शिकार रहे, फिर भी नाटक अपना असर छोड़ने में सफल रहा।
शहरी चकाचौंध के बीच में फंसी आम आदमी की जिंदगी को हाय पैसा हाय हास्य और व्यंग्य के पुट के साथ कहता है। जाहिर तौर पर पप्पू इस नाटक का केंद्र है। पप्पू की भूमिका में अमित कुमार छाए रहे। बाकी कलाकारों का काम भी ठीक ठाक रहा। शहरी जीवन की चकाचौंध और आम आदमी की समस्या को हल्के फुल्के अंदाज में उठाने की कोशिश सफल रही। संगीत पक्ष अच्छा रहा। नाटक में कई फिल्मी गीतों जैसे चल चल मेरी रामप्यारी, रब ने बना दी जोड़ी आदि का इस्तेमाल किया गया। यह कोशिश सफल रही।


नाटक का कथानक
मूल रूप से नाटक भौतिक सुख-सुविधाओं के साथ जीने तथा आधुनिक समय के ऐशो-आराम पाने की चाहत को बयां करता है। हाय पैसा हाय में नाटक का मुख्य पात्र पप्पू जो कि लालच से ओतप्रोत है और रुपया कमाने के लिए हर नुस्खा अपनाने को तैयार रहता है। वह किसी भी साधन को उपयोग तो करता है, लेकिन उसके नियम और कायदों को समझने की कोशिश नहीं करता। गांव से तबादला होने के कारण शहर पहुंचा पप्पू क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल शहर आकर करता है। यहां अपनी पत्नी के साथ खरीददारी करने बाजार गया पप्पू लाखों रूपए लागत की वस्तुएं खरीदकर क्रेडिट कार्ड के जाल में फंस जाता है। नाटक के दूसरे पहलू में पप्पू की मृत्यु हो जाती है और वह स्वर्गलोक पहुंचता है। यहां भी वह अपने लालच के बूते चैन नहीं पाता और जल्दी व अधिक पाने की लालसा के चक्कर में फंस जाता है। नाटक में फराह अनवर, अमित कुमार, अमर साह, लासिम अहमद, धरना चौहान, चिराग भनोत, मयंक त्रिपाठी, जीतेंद्र नागर, शिवम यादव आदि मुख्य भूमिका में रहेंगे।

मंच पर आज
जश्न-ए-विरासत राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव के छठवें दिन कोलकाता की नाट्य संस्था शिल्पभूमि नाटक कहां गया का मंचन करेगी। प्रसिद्ध लेखक किरन मैत्रा द्वारा लिखित व सुकामल मैत्रा द्वारा निर्देशित कहां गया नाटक को शिल्पभूमि द्वारा फरवरी माह में बांग्लादेश में आयोजित ढाका फेस्टिवल में भी मंचित किया जाएगा। बढ़ता उपभोक्तावाद और आम आदमी इस नाटक के केंद्र में हैं। यह नाट्य संस्था 10 वर्षों से नाटक प्रस्तुतिकरण देकर देश के विभिन्न हिस्सों में आम जनता को जागरूक करने में जुटी है। नाटक में निर्देशक सुकामल मैत्रा, प्रनय दास, ऑरिंदम दे, अमित विश्वास, शिल्पी कौर, गौतम घोष, कृष्णा पादावाला आदि मुख्य भूमिका में रहेंगे।

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