होती रहेगी खानापूर्ति तो कैसे सुधरेगी तस्वीर

Pauri Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
कॉमन इंट्रो -
व्यवस्था सुधारने के कभी अतिक्रमण हटाओ अभियान चलता है तो कभी वाहनों के चालान काटे जाते हैं। लेकिन विभाग की ओर से ये सब बस खानापूर्ति के लिए किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को पुलिस और प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की लेकिन एक घंटे बाद जब टीम लौट गई तो लोगों ने दोबारा अतिक्रमण कर लिया। वहीं यातायात व्यवस्था का जिम्मा भी बस तीन ट्रैफिक पुलिस कर्मियों पर है। ऐसे में खानापूर्ति के लिए अभियान चलते रहे और काम के लिए कर्मियों की कमी बनी रही तो व्यवस्थाओं में सुधार कैसे हो पाएगा। प्रशासन तो अपना काम जैसे तैसे कर रहा है लेकिन व्यवस्थाओं को सुधारने में हम सबको भी आगे आना चाहिए।

एक घंटे बाद फिर फैल गया अतिक्रमण
कोटद्वार। अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर बृहस्पतिवार को झंडाचौक तक एक घंटे तक पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई चली। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बारे में जानकारी मिलते ही कई अतिक्रमणकारियों ने अपना सामान दुकान के अंदर रख लिया तो कई व्यापारियों की ओर से किए अतिक्रमण को टीम ने हटवा दिया। जब टीम निरीक्षण करती रही तब तो सामान्य रहा, लेकिन एक घंटे बाद जब टीम लौट गई तो अतिक्रमणकारियों ने दोबारा सामान सजा लिया। त्योहारों पर शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। एसडीएम अनिल गर्ब्याल, सीओ अरुणा भारती और ईओ विजय पीएस चौहान लाव लश्कर लेकर अतिक्रमण हटाने में डटे थे।

इंसेट
दो ठेलियों तक सिमटा अभियान
शहर में प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के नाम पर सिर्फ दो जूस की ठेलियां ही नजर आईं। टीम ने दोनों ठेलियों को ट्रक में डालकर जब्त कर दिया गया। जूस बेचने वालों की इतनी ताकत भी नहीं थी कि वह प्रशासन से भिड़ सके। वहीं किसी बड़े व्यापारी का सामान उठाने की प्रशासन की हिम्मत नहीं हुई।

त्योहारों पर अतिक्रमण हटाने पर आपत्ति
प्रशासन की अतिक्रमण हटाने की मुहिम का व्यापारियों ने विरोध किया। उनका कहना था कि त्योहारों पर ही क्यों विशेष अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जाता है। जबकि अन्य दिनों पर भी यह अभियान चल सकता है। कुछ व्यापारियों ने तो झंडाचौक पर नारेबाजी करनी शुरू कर दी थी, लेकिन व्यापारियों ने उनको रोक दिया। काफी देर तक प्रशासन के साथ व्यापारियों की वार्ता भी होती रही।

विरोध के आगे बैकफुट पर आया प्रशासन
- अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन शुरू में तो बड़ी ऊर्जा के साथ आया था, लेकिन जब व्यापारियों ने अतिक्रमण हटाने के तरीके का विरोध किया तो प्रशासन बैकफुट पर नजर आया। थोड़ी देर औपचारिकता पूरी करने के बाद सभी उल्टे पांव चले गए।

जारी रहेगा अभियान
अतिक्रमण हटाने का विरोध होता है लेकिन त्योहारों में व्यवस्था बनाए रखने के लिए ही अतिक्रमण हटाओ अभियान चल रहा है। अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान जारी रहेगा। - अनिल गर्ब्याल, एसडीएम।

छह तारीख से पहले चलाया अभियान
प्रशासन के साथ छह नवंबर से 15 तक सड़क किनारे लाइन लगाकर सामान लाइन के अंदर रखवाने की बात हुई थी। लेकिन प्रशासन ने अचानक अतिक्रमण हटाने की मुहिम शुरू कर दी। व्यापार मंडल प्रशासन के साथ पूरा सहयोग करेगा। छह तारीख से पहले चले अभियान के चलते व्यापारियों ने विरोध किया। इसमें लाइन भी नहीं डाली गई। - राकेश गर्ग, अध्यक्ष नगर उद्योग व्यापार मंडल, कोटद्वार।
फोटो

तीन पुलिस कर्मियों के भरोसे ट्रैफिक व्यवस्था
सिविल पुलिस भी संभाल रही ट्रैफिक का जिम्मा
ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ाने को आज तक नहीं भेजा प्रस्ताव
कोटद्वार। शहर में प्रतिदिन बढ़ रही वाहनों की संख्या और इससे लग रहे जाम से लोगों का जीना मुहाल हो चुका है लेकिन शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधर ही नहीं पा रही है। सुधरे भी कैसे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सिर्फ तीन पुलिस कर्मी जो संभाल रहे हैं। कोतवाली में केवल तीन ही ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है, जबकि जरूरत इससे कहीं अधिक ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की है।
शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कुछ प्रयास जरूर किए गए, लेकिन वह प्रयास नाकाफी रहे। डिवाइडर लगाना फेल साबित हुआ। ट्रैफिक पुलिस भी तैनात की गई। लेकिन तैनात किए गए कर्मियों की संख्या कम होने के कारण ट्रैफिक नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। तैनात किए गए कर्मियों में एक हेड कांस्टेबल और दो कांस्टेबल शामिल हैं। इनमें से भी एक कांस्टेबल नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस पर होने वाली परेड में शामिल होने के लिए गया हुआ है। ऐसे में अभी यहां मात्र दो ही कर्मी तैनात हैं, इनकी संख्या बढ़ाने के लिए आज तक कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। जबकि व्यवस्था के अनुसार एक हेड कांस्टेबल और चार कांस्टेबल तैनात होने चाहिए थे।

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कोतवाली में भी पुलिस कर्मियों की कमी
इस समय सिविल पुलिस ही ट्रैफिक व्यवस्था की कमान संभाले हुए हैं। अभी तो किसी तरह काम चलाया जा रहा है, लेकिन शहर में किसी बडे़ आयोजन और अन्यत्र ड्यूटी पर जाने पर ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा जाती है। वहीं कोतवाली में भी पुलिस कर्मियों की पहले से चल रही कमी और बढ़ जाती है।

कहां-कहां है जरूरत
शहर के दो मुख्य चौराहों नजीबाबाद चौक और झंडाचौक के अलावा पटेल मार्ग तिराहा, मस्जिद तिराहा, देवी मंदिर तिराहा, बालासौड़ तिराहा और कौड़िया तिराहे पर जाम की समस्या बनी रहती है। यहां पर ट्रैफिक पुलिस की जरूरत है। वहीं सिद्धबली मंदिर के पास भी वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है। यहां कोई ट्रैफिक पुलिस कर्मी तैनात नहीं है।

क्या कहते हैं अधिकारी
- ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए तीन कर्मी तैनात हैं, लेकिन यह संख्या कम है। इनकी संख्या बढ़ाने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा जाएगा। - सीओ अरुणा भारती।

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