पौड़ी के हाथ से फिसली जीत, नैनीताल जीता

Pauri Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। 12वीं राज्य स्तरीय अंडर 19 विद्यालयी महिला क्रिकेट कप नैनीताल ने जीत लिया है। फाइनल मैच में नैनीताल की टीम ने पौड़ी को एक विकेट से हराकर टूर्नामेंट अपने नाम कर लिया।
जीआईएंडटीआई मैदान में आयोजित इस प्रतियोगिता के फाइनल मैच में पौड़ी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। इसमें पौड़ी की टीम ने आठ विकेट खोकर निर्धारित 20 ओवरों में 28 अतिरिक्त रनों की मदद से कुल 112 रन बनाए। बैट्समैन काजल ने 32, आशा ने 13 तथा कांति ने 15 रन बनाए। नैनीताल की गेंदबाज आरती ने चार ओवरों में 12 रन देकर एक विकेट झटका। दूसरी सफल गेंदबाज जानकी रही, जिसने चार ओवरों में 19 रन देकर एक विकेट लिया। लक्ष्य का पीछा करते हुए नैनीताल की की शुरूआत ठीक नहीं रही। ओपनर बल्लेबाज आरती मात्र छह रन पर क्लीन बोल्ड हो गई। प्रियंका पाल भी चार रन बनाकर सस्ते में निबट गई। चौथे बल्लेबाज के रूप में आई सरिता ने टीम को विजश्री दिलाने के लिए महत्वपूर्ण पारी खेली। अकेले 40 रन बनाकर सरिता मैदान में जमी रही। सरिता के साथ खष्टी बधानी (16 रन) और किरन (17 रन) भी अच्छा प्रदर्शन किया। पौड़ी की सुरुचि और मनीषा ने बेहतर क्षेत्ररक्षण किया, लेकिन अन्य सदस्य ऐसा नहीं कर पाए। अंतिम दो ओवरों में नैनीताल ने चार महत्वपूर्ण विकेट खोए, लेकिन अतिरिक्त रनों और खराब फील्डिंग ने पौड़ी को हरा दिया।
पूर्व पालिकाध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी ने प्रतियोगिता की विजेता तथा उपविजेता टीम को ट्रॉफी प्रदान की। इस मौके पर नगरपालिका अध्यक्ष मोहनलाल जैन ने विजेता टीम को 11 हजार, सभासद सुधांशु नौडियाल ने उपविजेता टीम को चार हजार रुपए, आयोजन समिति को नगर कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह नेगी ने दो हजार रुपये का पुरस्कार व्यक्तिगत तौर पर दिया। इस मौके पर अंपायर ललित बिष्ट व इंद्रमोहन जखमोला, स्कोरर जगदीश चौहान व मनीष कोठियाल रहे, जबकि कमेंट्रेटर बलवंत सिंह पंवार रहे। फिजियोथेरेपिस्ट प्रेम मोहन डोभाल, पीटीआई कृपाल सिंह पटवाल, गजपाल सिंह नेगी, बलराज सिंह गुसांई, जयकृत भंडारी आदि ने मैच के आयोजन में सहयोग किया। तीन दिन तक चले इस टूर्नामेंट में चार टीमों ने भाग लिया।


ये रहे बेस्ट
आशा गड़िया, पौड़ी -बेस्ट ऑलराउंडर
काजल भंडारी, पौड़ी -बेस्ट बैट्समैन
आरती रावत, नैनीताल -बेस्ट बॉलर
सलोनी नेगी, पौड़ी -बेस्ट विकेट कीपर


हर कदम पर अड़चन, कैसे निखरे प्रतिभा
भागवंती और विजयलक्ष्मी जैसी कई खिलाड़ियों के सपने हो रहे हैं चूर
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। पहाड़ में एक कहावत है कि जहां सोना है वहां नाक नहीं और जहां नाक है वहां सोना नहीं। हुनरमंद खिलाड़ियों की हमारे यहां कमी नहीं है। मगर बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। इस वजह से प्रतिभाओं के आगे बढ़ने के रास्ते में रुकावट ही रुकावट है। न मैदान हैं और न ही पास में स्कूल। ऐसे में खिलाड़ी आगे कैसे आ पाएंगे, यह बड़ा सवाल है।
जीजीआईसी लैंसडाउन की भागवंती पौड़ी जिले की अंडर 19 महिला क्रिकेट टीम की कप्तान है। पिछले साल वह उत्तराखंड की टीम से नेशनल में भी खेली। उसकी बहन विजयलक्ष्मी ने भी अंडर 19 महिला क्रिकेट में दो बार नेशनल खेला। वो भी पौड़ी क्रिकेट टीम की कप्तान रही। 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद विजयलक्ष्मी की प्रतिभा आज खेत-खलिहानों में काम करने तथा पानी जुटाने और दिनभर घर का कामकाज संभालने में ही खत्म हो रही है। दो बार अपने प्रदेश की टीम में खेल चुकी विजयलक्ष्मी अब क्रिकेट न खेल पाने से निराश है। घर में अपनी छोटी बहन भागवंती को अभ्यास कराकर वह सुकून महसूस कर रही है। भागवंती के अनुसार, उसकी बहन पास में डिग्री कालेज न होने के कारण प्राइवेट बीए कर रही है। इसलिए वह आगे क्रिकेट नहीं खेल सकती।12वीं की छात्रा भागवंती को यह भी नहीं मालूम कि इंटर पास करने के बाद वह क्रिकेट खेल पाएगी या नहीं!
कोट
- खेल मैदानों की कमी महिला खिलाड़ियों के आड़े आ रही है। छोटे से मैदान में प्रेक्टिस कराती हूं। पौड़ी की टीम में हमारे यहां से वर्तमान में छह खिलाड़ी हैं। भागवंती तथा विजयलक्ष्मी जैसी खिलाड़ियों को अभ्यास का मौका ही नहीं मिल पाया है। उसके बावजूद जब अवसर आया तो दोनों ने ही सबसे बेहतर प्रदर्शन करके दिखाया।
ज्योत्सना रावत, पीटीआई जीजीआईसी लैंसडाउन
- मेरी दोनों बेटियों को मैं खेलने की पूरी आजादी देता हूं। छह सदस्यों के परिवार की जिम्मेदारी है। मैं जानता हूं कि भागवंती और विजयलक्ष्मी को यदि अवसर मिले, तो वे सबसे बेहतर कर सकती हैं। कालेज गांव से दूर होने के कारण ही मैंने विजयलक्ष्मी को प्राइवेट फार्म भरवाया है।
कीर्ति सिंह रावत, भागवंती व विजयलक्ष्मी के पिता

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