लालढांग चिल्लरखाल सड़क पर ‘रोड़े’

Pauri Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
कोटद्वार। साढ़े तीन किमी लंबी सड़क और करोड़ों का बजट। वह भी स्वीकृत। दो करोड़ खर्च भी हो गए। यानी पैसे की कोई दिक्कत नहीं आने वाली है। बावजूद सड़क निर्माण का कार्य बंद हो गया। आमजन के लिए यह कार्रवाई समझ से परे है। यह कोई पटकथा नहीं बल्कि जंगलात विभाग के अधीन आने वाली लालढांग चिल्लरखाल सड़क का हाल-ए-बयां है। जिसपर रोड़े ही रोड़े नजर आ रहे हैं।
लालढांग चिल्लरखाल मार्ग पर 3.50 किमी कच्ची सड़क अब पक्की नहीं होगी। यह आदेश वन विभाग की ओर दिया गया है। इस सड़क की लंबाई चिल्लरखाल से लालढांग तक 11.50 किमी है। सड़क के पक्कीकरण के लिए लोनिवि की ओर से 8.50 करोड़ रुपए भी स्वीकृत है। इसमें से 8 किमी सड़क का निर्माण वन विभाग के नियंत्रण में ही लोक निर्माण विभाग ने गत वर्ष शुरू किया था। जबकि 3.50 किमी में सड़क का निर्माण कार्य वन विभाग ने शुरू किया था। हालांकि इस वर्ष विधानसभा चुनाव के दौरान इस सड़क का निर्माण कार्य रुकवा दिया गया था। उसके बाद चुनाव होने के बाद इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन उसे फिर से बंद करवा दिया गया। जो अब तक बंद पड़ा हुआ है। सड़क निर्माण अधूरा होने के कारण पैदल आवाजाही में भी दिक्कत हो रही है। इस दौरान सड़क निर्माण पर लगभग 2 करोड़ की धनराशि खर्च हो चुकी है। हालांकि विभाग की ओर से कार्य बंद कराने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। दोनों ओर वन विभाग का बैरियर होने के कारण बिना अनुमति कोई वाहन आ जा नहीं सकता।

लोगों ने किया धरना प्रदर्शन
- इस मार्ग को खोलने के लिए लोगों ने लालढांग सहित कोटद्वार में भी सितंबर माह में धरना प्रदर्शन किया। वहीं पूर्व विधायक शैलेंद्र सिंह रावत की ओर से डीएफओ लैंसडौन का घिराव भी किया गया। जिसमें हुआ कि मार्ग को जल्दी ही खुलवा दिया जाएगा। साथ ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। लेकिन अभी तक मार्ग निर्माण न होने के कारण वाहन पूरी तरह से नहीं चल पा रहे हैं। वहीं हरिद्वार को जाने वाले हाईवे की दूरी लालढांग से लगभग 9 किमी है। लालढांग से हाईवे तक की सड़क पक्की बनी हुई है।

क्या होता है लाभ
- इसके बनने से कोटद्वार के व्यापारियों को देहरादून और हरिद्वार से सामान लाने के लिए उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा। जिससे यूपी में टैक्स देने से राहत मिलेगी। समय से भी बचेगा और किराया भी।
- पौड़ी से देहरादून की यात्रा में एक घंटे की बचत। किराया भी कम ।


कोट
- साढ़े तीन किमी सड़क का निर्माण वन विभाग की ओर से कच्ची सड़क के रूप में ही होगा। बाकी 8 किमी सड़क का निर्माण लोनिवि डामरीकरण के रूप में कर सकती है। साथ ही इसको खोलने का निर्णय प्रदेश सरकार ही ले सकती है।
- नरेंद्र सिंह चौधरी, प्रभागीय वनाधिकारी, लैंसडौन वन प्रभाग

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