विज्ञापन

वन विभाग को डीएम के आदेश का इंतजार

Pauri Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
कोटद्वार। वन पंचायतों के चुनाव के लिए तहसील प्रशासन और वन विभाग तैयारी में है बस इंतजार है डीएम के आदेश मिलने का। संभावना है कि नवंबर महीने में वन पंचायतों के चुनाव हो सकते हैं, जिसके बाद गांवों के वनों का विकास हो सकेगा। विभाग भी इसके लिए डीएम की ओर से हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहा है।
विज्ञापन
वन पंचायतों की प्रक्रिया के तहत वन विभाग के वनों के साथ ही वन क्षेत्र के गांवों के भी अपने वनों की व्यवस्था की गई है। लैंसडौन वन प्रभाग और तहसील क्षेत्र में वर्ष 2006 में वन पंचायतों का पहली बार गठन किया गया था इसके बाद अभी तक दोबारा चुनाव नहीं हुए। इस कारण वन पंचायतों के विकास कार्य सही तरीके से नहीं हो पा रहे हैं। नए चुनाव के तहत इस बार सरपंच के 50 प्रतिशत पदों पर महिलाओं के चुने जाने की सरकार ने नियमावली तैयार कर दी है। जिसके कारण प्रदेश में इसके चुनाव नई व्यवस्था के अनुसार होंगे। जिससे महिलाएं ग्राम वनों का संरक्षण, उनका उपयोग और अन्य व्यवस्था कर सकेंगी। वन पंचायतों के तहत गांव का एक व्यक्ति सरपंच और वन विभाग का फॉरेस्टर उसका सचिव होता है, जिसकी सहमति के बाद वन क्षेत्र का विकास होता है।

इंसेट
क्यों हैं वन पंचायतें जरूरी
- वन पंचायतों में ग्रामीणों के गांव के अपने वन होते हैं।
- इन वनों में ग्रामीण अपने निर्णय के अनुसार पौधों का रोपण कर सकते हैं।
- पेड़ों की नीलामी कर सकते हैं।
- मिलने वाले राजस्व से वनों का विकास और ग्राम विकास के लिए व्यवस्था।
- वन क्षेत्र का अच्छा विकास हो तो पर्यटकों के लिए उस वन क्षेत्र का प्रयोग कर सकते हैं।
- वन विभाग की ओर से आर्थिक मदद और तकनीकी जानकारी वन पंचायतों को दी जाती है।

क्या आ रही हैं दिक्कतें
- अभी वन पंचायतों के चुनाव के लिए शासन से कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। इस पर विचार चल रहा है। संभव है चुनाव नवंबर तक करा लिए जाएं। इसके लिए निरीक्षकों की नियुक्ति शासन की ओर से की जानी है। चुनाव का कार्य एसडीएम के माध्यम से संपन्न होना है।

क्या कहते हैं अधिकारी
- वन पंचायतों के लिए चुनाव नवंबर में कराए जाने संभावित हैं। इसके लिए डीएम से निर्देश मिलने की प्रतीक्षा की जा रही है। जैसे ही निर्देश मिलेंगे चुनाव करा लिए जाएंगे। - अनिल गर्ब्याल, एसडीएम।

- वन पंचायतों के चुनाव के लिए जिलाधिकारी को कई पत्र दिए गए हैं। जब उनकी ओर से हरी झंडी मिलेगी तो चुनाव होंगे। वहीं वन पंचायतों के गठन न होने से पंचायती वनों का विकास नहीं हो पा रहा है। - नरेंद्र सिंह चौधरी, डीएफओ लैंसडौन।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Election
  • Downloads

Follow Us