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जनता के पैसे से हर जगह खिलवाड़

Pauri Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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दुगड्डा। अक्षय ऊर्जा विभाग की ओर से करीब बीस साल पहले बनाया गया बायोगैस संयंत्र कभी चल ही नहीं पाया। अब यह बेकार हो चुका है। फिलहाल यह नगर पालिका की जगह घेरे हुए है। पालिका इसको हटवाने के लिए संबधित विभाग को नोटिस दे चुकी है। उरेडा की ओर से एनएच के किनारे 1992-93 में सार्वजनिक शौचालय से बायोगैस बनाने की पहल की गई थी। इसके लिए एक सार्वजनिक शौचालय बनाया गया था। वहां पर गैस प्लांट लगाया गया। इससे गरीब लोगों को मुफ्त में गैस दी जानी थी। इसके लिए नजदीक की बस्तियों में लाइन भी बिछाई गई, लेकिन इसमें निर्माण तो हुआ, मगर इसे चलाया कभी नहीं गया। न किसी को लाभ पहुंचा न किसी ने गैस ली। विभाग अक्षय ऊर्जा के नाम पर सिर्फ पैसे ही खर्च कर गया। पालिका इसको जल्दी हटवाकर कुछ और निर्माण करवाने की योजना बना रही है।
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-इस प्लांट से लाइन भी बस्ती में बिछाई गई थी, लेकिन यह निर्माण के दौरान ही क्षतिग्रस्त हो गई। उसके बाद यह फिर कभी नहीं बना। -चंद्रपाल
-गरीब लोगों को गैस देने वाली यह योजना सफल नहीं हो पाई थी। अब तो इस बारे में हम भूल भी चुके हैं। - शंभू सिंह

कोट---

-जिस उद्देश्य के लिए यह संयंत्र बनाया गया था, उसमें यह कामयाब नहीं हो पाया। इसको हटाने के लिए उरेडा कोे नोटिस भेजा गया है। ताकि हम जन हित में इस जगह का अच्छा इस्तेमाल कर सकें। -विमला, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद दुगड्डा।






कागजों में ही बना 50 हजार का विश्राम गृह
कोटद्वार। ग्राम पंचायत कुल्हाड़ के बेटीधार में विश्राम गृह कागजों में तो बनकर तैयार हो गया है, लेकिन जिस स्थान पर विश्राम गृह भवन दर्शाया गया है वहां पर कोई भवन नहीं बना हुआ है। इसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ।
सूचना का अधिकार संरक्षण संगठन की ओर से ग्राम पंचायत कुल्हाड़ में हुए कार्यों के संबंध में सूचना मांगी कई थी। खंड विकास अधिकारी की ओर से दी गई सूचना में ग्राम सभा के अंतर्गत वर्ष 2008-09 में पचास हजार रुपये की लागत से विश्राम गृह बनाया गया है। इसमें योजना पूर्ण होना भी बताया गया है, जबकि गांव में उस जगह पर कोई विश्राम गृह नहीं बना है। इससे स्पष्ट है कि विश्राम गृह का कार्य फाइलों में तो बनकर तैयार हुआ है, लेकिन वह पैसा कहां गया किसी को पता नहीं। खंड विकास अधिकारी ने भी बिना जांच पड़ताल किए योजना को पूर्ण होना दर्शाया है।

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