प्रधानाचार्य वांटेड, प्रबंधक के खाते सीज

Pauri Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
कोटद्वार। सीवी रमन इंस्टीट्यूट फर्जीवाड़े मामले में संस्थान प्रबंधन को एक ही दिन में दो बड़े झटके लगे हैं। एक ओर संस्थान की प्रधानाचार्या मुक्ति परिहार को वांटेड घोषित कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक हिरासत में जेल भेजे गए संस्थान प्रबंधक अनिल परिहार के दो बैंक खाते प्रशासन ने सीज कर दिए हैं। प्रधानाचार्या की पुलिस को काफी दिनों से तलाश है। दूसरी तरफ, फर्जीवाडे़ से संबंधित इस मामले में इंस्टीट्यूट के छात्रों का धरना 20 वें दिन भी जारी रहा।
सीवी रमन इंस्टीट्यूट की प्रधानाचार्या की गिरफ्तारी में नाकाम रही पुलिस ने उसे वांटेड घोषित कर दिया है। छात्रों की मांग पर संस्थान प्रबंधक के दो खाते सीज कर दिए गए हैं। पुलिस ने संस्थान की प्रधानाचार्या के किराये के घर पर नोटिस चस्पा कर दिया है। उसकी जल्द गिरफ्तारी और सरेंडर नहीं करने की स्थिति में उसकी संपत्ति कुर्क करने पर पुसि विचार कर रही है। इधर, आंदोलित छात्रों ने मान्यता प्राप्त संस्थान में प्रवेश और ब्याज सहित पैसे वापस देने की मांग दोहराई है। सोमवार को छात्रों ने सचिवालय कूच का ऐलान किया है।


क्या है मामला
सीवी रमन इंस्टीट्यूट के तीन सौ से ज्यादा छात्र 25 सितंबर 2012 से आंदोलित हैं। उनका कहना है कि संस्थान एआईसीटी से संबद्घ नहीं है, लेकिन भ्रामक जानकारी देकर उनके दाखिले कराए गए। इस मामले में छात्रों ने आंदोलन शुरू किया, तो पुलिस और प्रशासन पर दबाव बना। छात्रों ने बाद में संस्थान के प्रबंधक अनिल परिहार के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया। 30 सितंबर को प्रशासन ने संस्थान को सीज कर दिया। पांच अक्तूबर को हाईकोर्ट से परिहार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गई, तो उसने अगले दिन कोतवाली में सरेंडर कर दिया। इस मामले में एसडीएम स्तर से हुई जांच में संस्थान की मान्यता और तमाम अन्य दावे गलत निकले हैं। हालांकि छात्रों ने एसडीएम की जांच पर भी सवालिया निशान उठाए हैं। प्रबंधक के अलावा प्रधानाचार्य की गिरफ्तारी के लिए छात्र दबाव बना रहे हैं।


अनिल परिहार और संस्थान
-अनिल परिहार ने पुलिस को मूल रूप से मध्य प्रदेश का रहने वाला बताया था, लेकिन पुलिस को दिए वहां के सारे पते पुलिस की जांच में फर्जी पाए गए। परिहार 2003-04 में कोटद्वार आने से पहले दुबई में नौकरी करता था। वह कोटद्वार अपने किसी दोस्त के साथ आया और दोनों ने मिलकर एक संस्थान खोला। कुछ समय बाद दोनों अलग-अलग हो गए। पूर्व में खोले गए संस्थान के नाम पर ही इसने पदमपुर में एक सीवी रमन नाम से इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट खोला। उसके बाद से ही वह इस संस्थान को चला रहा था, लेकिन इस संस्थान को केवल प्रमोशन कोर्स करवाने के लिए ही मान्यता दी गई थी। 2003-04 से चल रहे इस संस्थान की ओर से दिखाए गए कागजात में भी भिन्नता हैं।

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