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गैस नहीं, मिट्टी तेल बंद, लकड़ी पर पाबंदी

Pauri Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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लैंसडौन। सरकारी सिस्टम की मार आम जनता पर कैसे पड़ती है इसका जीता जागता उदाहरण है लैंसडौन क्षेत्र। यहां पर पिछले 15 दिनों से गैस सिलेंडर का ट्रक नहीं पहुंचा। छह महीने से मिट्टी तेल नहीं मिला। जंगल से लकड़ी तोड़ने पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई है। लोगोें के सामने खाना पकाने का संकट गहराने लगा है। चारों ओर हाहाकार मचा है।
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लैंसडौन गैस एजेंसी के पास चार विकास खंडों के 20424 कनेक्शन हैं। 15 दिन पहले यहां पर एक गैस सिलेंडर का ट्रक आया था, जिसमें 288 सिलेंडर थे। वह लैंसडौन और दो अन्य गावों के लोगों को वितरित किया गया, लेकिन उसके बाद अब तक यहां पर सिलेंडर का ट्रक नहीं आया। लोग हर दिन गैस कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनको निराशा ही हाथ लग रही है। लोगों के सामने खाना पकाने का संकट खड़ा हो गया है। गैस कनेक्शन धारकों को मिट्टी तेल मिलना भी बंद हो गया है। जंगल से कोई लकड़ी भी नहीं तोड़ सकता है। अब लोग हर दिन गैस का ट्रक आने की इंतजारी में रहते हैं। इस संबध में व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष कपिल अग्रवाल कहते हैं कि लंबे समय से दिक्कत बनी हुई है। गैस कार्यालय के सहायक प्रबंधक गिरीश कोटनाला का कहना है कि गैस आपूर्ति के लिए प्लांट को कई बार डिमांड भेजी गई है, लेकिन गैस नहीं भेजी जा रही हैै। हर महीने यहां पर कम से कम पांच हजार सिलेंडरों की आवश्यकता है, लेकिन अभी तक 15 दिनों में 288 सिलेंडर ही पहुंच पाए हैं।


एक सिलेंडर के लिए तीन बार लाइन
श्रीनगर। उफल्डा के ग्रामीणों को गैस सिलेंडर लेने के लिए खूब दौड़-भाग करनी पड़ रही है। गैस सिलेंडर के लिए तीन-तीन बार लाइन में लगना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने समस्या को देखते हुए गैस वितरण के दौरान ही बुकिंग कराने की मांग प्रशासन के समक्ष रखी गई है। उफल्डा के पूर्व प्रधान रमेश रावत का कहना है पहले ग्रामीण उफल्डा से श्रीनगर गैस एजेंसी में गैस बुकिंग कराने आते है, उसके बाद बुकिंग के पैसे जमा कराने की पर्ची कटाने और फिर गैस लेने के लिए अलग-अलग दिनों तक घंटों लाइन खड़ा होना पड़ता है। रावत ने बताया कि गैस एजेंसी और प्रशासन से ग्रामीणों की इस समस्या का समाधान करने की कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी है। दूसरी तरफ, एसडीएम रजा अब्बास का कहना है कि ग्रामीणों की गैस बुकिंग, वितरण से जुड़ी समस्या संज्ञान में आई है। इसके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।

कई गांवों में नहीं मिली तीन माह से गैस
घनसाली (टिहरी)। भिलंगना प्रखंड़ की तीन पट्टियों में तीन महीने से रसोई गैस नहीं पहुंच रही है। जिससे लोगों ने अब जंगलों की और रुख कर दिया है। जिससे पर्यावरण को संरक्षित करने वाले हरे पेडों की भी शामत आ गई है। साथ ही लोगों की दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है। लेकिन सरकार और प्रशासन जनता की समस्या की और ध्यान नही दे रहे है।
प्रखंड की ग्यारह गांव, हिंदाव तथा नैलचामी पट्टियों के दर्जनों गांवों के उपभेक्ताओं को तीन माह से गैस नही मिल पाई है। रामेश्वरी देवी, सावित्री, सीमा देवी, कमला, विमला और शाकंबरी देवी का कहना है कि तीन माह से गैस नहीं मिल रही है। जिससे लंबे चौडे़ परिवार का खाना पकाना मुश्किल हो गया है। साथ ही उन की दिनचर्या भी प्रभावित होने से ही अब जंगल मे लकड़ी काटने जाना पड़ रहा है। जिन जंगलों को हमने पाला था उन्हें अब हमें अपने पेट की भूख बुझाने के लिए मजबूरी में काटना पड़ रहा है। गैस एजेंसी के प्रबंधक टीआर भट्ट ने कहा कि ग्याहर गांव क्षेत्र में सड़क टूटने के कारण गैस नहीं गई। एक दो दिन में गैस भेजी जाएगी। बाकी अन्य क्षेत्रों में गैस जा रही है। प्लांट से गैस की आपूर्ति कम हो रही है। इसलिए भी उपभोक्ताओं को समय पर गैस मिलने में दिक्कतें आ रही है।

सत्यापन नहीं होने पर नहीं दी गई गैस
देवप्रयाग। गैस कनेक्शन का सत्यापन नहीं होने पर यहां गैस सिलेंडर का वितरण करने आए श्रीनगर गैस एजेंसी के कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं को बैरंग लौटा दिया। जिस पर उपभोक्ताओं ने हंगामा काटा। कहा कि 31 अक्तूबर तक सत्यापन प्रक्रिया बंद है। उसके बावजूद गैस वितरण न किया जाना तानाशाही है। उपभोक्ताओं ने गैस सत्यापन के लिए देवप्रयाग में कैंप लगाने की भी मांग की।
देवप्रयाग क्षेत्र के उपभोक्ता गैस के लिए इंडेन गैस एजेंसी श्रीनगर पर निर्भर हैं। शुक्रवार को गैस वितरण करने पहुंचे एजेंसी के कर्मचारियों ने बिना सत्यापन वाले कनेक्शनों पर गैस नहीं दी। उपभोक्ताओं ने नाराजगी जताते हुए गैस सत्यापन प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगाए। कहा कि एजेंसी को देवप्रयाग में कैंप लगाकर समस्याएं हल करनी चाहिए। विरोध जताने वालें में विद्यार्थी पालीवाल, दीर्घपाल गुसाईं, आशीष भट्ट, विनोद टोडरिया, मनमोहन सिंह, सुदर्शन असवाल आदि मौजूद थे। श्रीनगर इंडेन गैस एजेंसी के प्रबंधक बीएस शाह ने उपभोक्ताओं को शांत कराते हुए कहा कि जिन उपभोक्ताओं ने 2007 से 2009 तक की अवधि में सिलेंडर नहीं लिए हैं, उनका रिकार्ड बरेली में है। कहा राशन कार्ड, फोटो पहचान पत्र, बिजली या पानी का बिल गैस एजेंसी श्रीनगर लाकर गैस कनेक्शन का सत्यापन करा लें।
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