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चौलाई से गुलजार है रिगोली मल्ली क्षेत्र

Pauri Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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कीर्तिनगर। लोस्तु बडियारगढ क्षेत्र के रिगोली मल्ली क्षेत्र आज कल चौलाई से गुलजार है। क्षेत्र में चौलाई की फसल लहलहाने से काश्तकारों के चेहरों पर रौनक आ गई है। इस बार अच्छा मुनाफा होने की संभावना जताई जा रही है। काश्तकारों को एक किलो चौलाई के बदले स्थानीय बाजार में दो किलो चावल दिया जा रहा है।
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लोस्तु बडियारगढ पट्टी के रिगोली मल्ली क्षेत्र में काश्तकार परंपरागत तरीके से चौलाई की खेती करते आ रहे है। चौलाई के लिए प्रसिद्ध इस क्षेत्र में प्रति परिवार की लगभग 20 से 30 कुंतल चौलाई की पैदावार हो जाती है। काश्तकारों को स्थानीय बाजार में इसके विपणन की सुविधा मिलने से अच्छा लाभ हो जाता है। इस समय चौलाई के दाम प्रति किलो 40 रुपये है। स्थानीय दुकानदार गांवों से आने वाली चौलाई को एकत्रित कर इसे बड़ी मंडियों तक पहुंचाते हैं।

कोट
सिंचित भूमि न होने से पहले लोग चौलाई को बेचकर ही चावल या अन्य खाद्य सामग्री जुटाते थे। जिससे लगभग आठ माह तक के राशन की व्यवस्था हो जाती थी।
-बचूली देवी (90) ग्रामीण
--
सरकार की ओर से अभी तक चौलाई के लिए कोई फसल बीमा योजना शुरू नहीं की गई है। यदि बिचौलियों के स्थान पर सरकारी स्तर से इसके विपणन की व्यवस्था होती तो इसका हमें अच्छा लाभ मिलता।
-हुकम सिंह कंडारी, काश्तकार
--
-चौलाई की फसल के नुकसान होने पर बीमा योजना लागू नहीं है। कृषि विभाग को जब कभी चौलाई खरीदने की जरूरत पड़ती तो वह गांव के काश्तकारों से संपर्क करता है।
-प्रेम सिंह बुटोला, सहायक कृषि अधिकारी कीर्तिनगर।

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