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महिला बीटीसी प्रशिक्षितों पर भारी पड़ रहे नियम

Pauri Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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पौड़ी। बीटीसी प्रशिक्षित महिलाओं को उनके ससुराल वाले जनपदों में नियुक्ति नहीं मिल पा रही है। नई प्रारंभिक अध्यापक सेवा नियमावली इसमें आडे़ आ रही है। नियमावली में प्रावधान है कि जिन अभ्यर्थियों की शादी प्रशिक्षण के लिए चयन के बाद हुई है, उन्हें उनकी ससुराल वाले जनपद में नियक्ति दी जा सकती है। लेकिन जिनका विवाह प्रशिक्षण में चयन से पहले हो चुका है, उनका यह लाभ नहीं दिया जा सकता। उन्हें उसी जनपद में नियुक्ति दी जा सकती है, जिससे उन्हाेंने प्रशिक्षण प्राप्त किया हो। जिससे कई प्रशिक्षित महिलाओं के सामने दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है।
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शासन ने बीटीसी प्रशिक्षण के लिए 2005 में विज्ञप्ति जारी की थी। जिसके बाद उनका प्रशिक्षण 2009 में शुरू होकर 2012 में पूरा हुआ। इस बीच कई महिलाओं की शादियां होने से उनके जनपद बदल गए। अब वे अपने ससुराल वाले जनपद में नियुक्ति चाहती हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहे हैं। आवेदन करने के बाद उनकी शादी दूसरे जिलों में हो गई। जबकि प्रशिक्षण के लिए उनका चयन मायके वाले जिलों के प्रशिक्षण संस्थानों में ही हुआ था। बीटीसी प्रशिक्षित रजनी, सुनीता और सुमति सहित अन्य प्रशिक्षित चाहती हैं कि उन्हें उनकी ससुराल वाले जनपदों में नियुक्ति मिलनी चाहिए। वह तर्क देती हैं कि प्रशिक्षित होना जरूरी है, नियुक्ति चाहे जहां भी चाहें। उन्होंने कहा कि बीटीसी प्रशिक्षण के लिए आवेदन 2005 में मांगे गए थे। जबकि चयन 2009 में हुआ था। इसका नई नियमावली बनाते वक्त इसका ध्यान रखना चाहिए था।

कोट-
प्रारंभिक अध्यापक सेवा नियमावली-2012 के तहत प्रशिक्षण के लिए चयन होने के बाद जिन महिला अभ्यर्थियों की शादी दूसरे जिलों में हो गई है, उन्हें नियुक्ति के लिए एनओसी दी जा रही है। प्रशिक्षण के लिए चयन होने से पहले वाले मामलों में कुछ नहीं किया जा सकता है। -चंद्र पाल सिंह यादव अपर शिक्षा निदेशक बेसिक गढ़वाल मंडल पौड़ी

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