करोड़ों की पाइप लाइन ‘दफन’

Pauri Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
रमेश नेगी
पौड़ी। शहर की पेयजल व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए जल निगम ने एक दशक पहले पांच करोड़ की लागत से पाइप लाइन का निर्माण कराया था। सरकारी तंत्र की लापरवाही का आलम यह है कि यह पाइप लाइन मिट्टी के अंदर ही दफन है। आज तक इसका कोई उपयोग नहीं किया गया है।
शहर में पेयजल समस्या का समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। पानी की कमी तो एक वजह है ही, पाइप लाइन लीकेज के चलते हजारों लीटर पानी बेकार बह रहा है। इस समस्या का समाधान तलाशने को यूपी के समय में वर्ष 1998-99 में शहर में नई पाइप लाइन योजना के लिए 488.48 लाख की राशि स्वीकृत की गई। इस योजना को दो चरणों में पूरा किया गया। उसके बाद से ही पाइप लाइन निष्प्रयोज्य पड़ी है। सालों से जमीन में दबे पाइप जंग खा रहे हैं।
अहम बात यह है कि एक तरफ करोड़ों की लागत वाली पाइप लाइन का उपयोग नहीं किया जा रहा है तो दूसरी तरफ लीकेज रोकने के नाम पर अलग से करोड़ों खर्च करने के बाद आज भी पानी सड़कों पर बह रहा है। विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि योजना का निर्माण करने वाले जल निगम के अभियंताओं को अब यह भी जानकारी नहीं है कि यह पाइप लाइन कहां से कहां तक डाली गई है। उपभोक्ता सुरेंद्र चिटकारिया, वीरेंद्र सिंह, अर्जुन सिंह आदि कहते हैं कि लीकेज के कारण हजारों लीटर पानी नालियों में बर्बाद हो रहा है। योजना पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई। इस योजना को दफन करने की कोशिशें कौन कर रहे हैं, इसकी जांच होनी चाहिए।
कोट----------
--इस महत्वपूर्ण योजना को गंभीरता से नहीं लिया गया। जमीन के नीचे सिर्फ जंक खा रही इस पाइप लाइन का उपयोग कराने के लिए प्रयास होंगे। गणेश नेगी, पूर्व पालिकाध्यक्ष, पौड़ी
--यह पाइप लाइन 135 लीटर प्रति व्यक्ति क्षमता के अनुरूप डाली गई। उस वक्त पर्याप्त पानी न होने के कारण जल संस्थान ने इसे नहीं लिया। अब नानघाट का पानी नियमित चल रहा है। वितरण लाइन जोड़ने में अब कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।- आरबी मौर्य, अधिशासी अभियंता, जल निगम

पौड़ी शहर में 90 के दशक में बिछाई गई पेयजल वितरण लाइन शहर में कुछ जगह जल संस्थान ने जल निगम से अधिग्रहीत कर ली है। कुछ जगहों पर अभी यह लाइन जल निगम से संस्थान को हैंड ओवर नहीं हो पाई है।
-आरके रोहेला, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान पौड़ी

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