बेस अस्पताल की दशा पर सुलग रहा आंदोलन

Pauri Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा बेस चिकित्सालय, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान का टीचिंग अस्पताल क्या बना कि यहां रोगियों को मिलने वाली कई सुविधाएं ही बंद हो गई। अस्पताल में विभिन्न विभागों की बिगड़ती व्यवस्था से लोग त्रस्त है। इस पर संयुक्त संघर्ष समिति अब आंदोलन छेड़ने का मन बना रही है।
वर्ष 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बेस चिकित्सालय का लोकार्पण किया था। पूर्व में मिलने वाली सुविधाओं के अब बंद हो जाने से विभिन्न स्थानीय संगठन नाराज हैं। संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले अस्पताल की अव्यवस्थाओं के खिलाफ विभिन्न संगठन मुखर होने जा रहे हैं। यहां आयोजित एक कार्यक्रम में बेस चिकित्सालय के बिगड़ते हालात पर संयुक्त संघर्ष समिति, रोटरी क्लब, कैमिस्ट एसोसिएशन व व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने विस्तृत बातचीत की। इस मौके पर कैमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश नौटियाल ने कहा कि बेस अस्पताल में चार वर्ष पूर्व जो सुविधाएं मिलती थी, अब वे भी नहीं मिल पा रही हैं। यह कैसा सुविधायुक्त संस्थान है, जहां रोगी को इलाज देने के लिए भर्ती किया जाता है और हालत गंभीर होने पर रेफर। इस मौके पर संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष अनिल स्वामी ने कहा कि बैठक आयोजित कर आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। इस मौके पर विदुर काला, एडवोकेट भूपेंद्र पुंडीर, सुधाकर भट्ट, विकास कठैत, प्रभाकर बाबुलकर, रोटरी क्लब के अध्यक्ष धनेश उनियाल, बृजेश भट्ट, प्रदीप मल्ल, अजय कुकसाल, व्यापार संघ कोषाध्यक्ष वासुदेव कंडारी आदि ने विचार व्यक्त किए।

ये सुविधाएं मिलती थी चार वर्ष पूर्व-
डायलिसिस: बेस अस्पताल में डायलिसिस की दो मशीनें हैं। तकनीशियन नियुक्त है, जो मेडिसिन विभाग के बाहर पर्चियों के नंबर चढ़ाने का कार्य करते हैं। विभाग मेें छह डॉक्टर हैं, जो डायलिसिस कराने में सक्षम हैं, लेकिन मशीनें किस हालत में हैं, यह बताने वाला कोई नहीं।
अल्ट्रा साउंड: चार वर्ष पूर्व तक बेस अस्पताल में प्रतिदिन 40 से अधिक अल्ट्रासाउंड हुआ करते थे, जबकि वर्तमान में एक वर्ष से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। दो डॉक्टर आए। एक 15 दिन तक रहे और दूसरे दो दिन में ही विभाग पर ताला लटकाकर चले गए।
सिटी स्कैन: एक तकनीशियन के सहारे अस्पताल में सिटी स्कैन हो रहे हैं। ऐसे में सिटी कराया जाता है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण सीटी की रिपोर्ट ही नहीं दी जाती। हर 15-20 दिन में मशीन में मशीन के खराब होने की शिकायतें भी आती हैं।


कृपया एसआरआई 08 के साथ जोड़ने का कष्ट करें-
कोट
- हमारे पास डा.कलम सिंह बुटोला डायलिसिस के लिए अनुभवी डॉक्टर हैं। तकनीशियन की तैनाती भी कालेज में की गई है। शीघ्र ही कंपनी की ओर से मशीन के परीक्षण के लिए तकनीशियन यहां आएगा। उसके समक्ष ही मशीन का परीक्षण किया जाएगा। ताकि सफलता पूर्वक डायलिसिस सुविधा बेस अस्पताल में रोगियों को मिल सके।
डा.वीएल जहागिरदार, राजकीय मेडिकल कालेज

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