सरकार पैसे को लगाया जा रहा ठिकाने

Pauri Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
कोटद्वार। स्वास्थ्य और स्वच्छता के नाम पर राजस्व गांवों को मिलने वाली धनराशि कहां खर्च हो रही है इसकी किसी को जानकारी नहीं है। कुछ गांवों को छोड़ दें तो न तो गांवों में सही तरह से सफाई होती है और न स्वास्थ्य के नाम पर कुछ किया जा रहा है, लेकिन सरकार के खाते से धनराशि हर वर्ष ग्राम पंचायतों को दी जाती है। जब ग्राम प्रधान इसकी रिपोर्ट सरकार तो भेजते हैं तो उसमें झाड़ियां काटने में धनराशि खर्च होना बताया जाता है।
दो साल पहले प्रदेश सरकार ने राजस्व गांवों को ग्राम स्वास्थ्य और स्वच्छता समिति के नाम से हर वर्ष दस हजार रुपये देने का निर्णय लिया था। एक ग्राम सभा के अंतर्गत जितने राजस्व ग्राम होंगे उनको उसी के हिसाब से धनराशि मिलेगी। इस राशि से गांवों की सफाई व्यवस्था और स्वास्थ्य से संबधित कार्य करने होते हैं। गांवों की नालियों को साफ करना, आपातकालीन स्थिति में किसी मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना समेत कई कार्य होते हैं, लेकिन आज तक गांवों में यह कार्य हुए ही नहीं। अधिकांश लोग आपातकालीन स्थिति में या तो 108 का सहारा लेते हैं या फिर निजी व्यवस्था से अस्पताल पहुंचते हैं। यही नहीं कई जगहों पर तो क्षेत्रीय लोगों को इस बारे में जानकारी ही नहीं है। हर वर्ष पैसों के खर्चे का हिसाब बनाकर सरकार को भेजना होता है। अधिकांश जगहों पर ग्राम प्रधान झाड़ी कटान आदि पर पैसा खर्च करने की रिपोर्ट देते हैं। दस हजार रुपये में सिर्फ झाड़ियां ही काटी जाती हैं। इससे साफ है कि सरकारी पैसे को ठिकाने लगाया जा रहा है।

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320 हैं राजस्व गांव
कोटद्वार तहसील के अंतर्गत 320 राजस्व गांव हैं। इस हिसाब से तीन करोड़ बीस लाख रुपये तो कोटद्वार तहसील के अंतर्गत ही बंट जाता है। यह धनराशि प्रदेश सरकार से ब्लाकों में आती है और यहीं से ग्राम पंचायतों के खाते में चली जाती है। एक ग्राम सभा में जितने राजस्व गांव होेंगे उनको उतना ही अधिक पैसा मिलेगा।

क्या कहते हैं ग्राम प्रधान
- इस धनराशि से ग्राम सभा के राजस्व गांवों में सफाई का काम किया जाता है। स्वच्छता अभियान के तहत आशाओं को भी इसमें से कुछ मानदेय दिया जाता है। साफ-सफाई के लिए यह धनराशि काफी कम है। एक मोहल्ले के लिए भी यह कम पड़ जाता है। - सुभाष पांडे, ग्राम प्रधान बालासौड़।

इस धनराशि से बरसात के बाद झाड़ी कटान और नाली की साफ सफाई का काम किया जाता है। यह राशि गांवाें की स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए सरकार की ओर से दिया जाता है। - विमला देवी रावत, ग्राम प्रधान सनेह।

यह पैसा ब्लाक कार्यालय से ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी के ज्वाइंट एकाउंट में दिया जाता है। लेकिन जिस उद्देश्य से यह पैसा दिया जाता है उसकी पूर्ति नहीं हो रही है। प्रशासन स्तर से इसकी जांच हो सकती है। - डा. एके सिंह, सीएमओ पौड़ी।

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