भूधंसाव से केष्टा गांव के कई तोक प्रभावित

Pauri Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
कोटद्वार। विकास खंड दुगड्डा की ग्राम पंचायत केष्टा के उप ग्राम भूधंसाव की चपेट में आ गए हैं। इसमें ग्राम दऊ तोक में 1960 से लगातार हो रहे भूधंसाव से काफी जमीन नष्ट हो चुकी है। इस बारे में लोग लगातार आवाज उठा रहे हैं। बावजूद इसके अब तक सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। अब ग्रामीणों ने फिर एसडीएम अनिल गर्ब्याल से बचाव की गुहार लगाई है। एसडीएम ने इसके लिए नायब तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए। साथ ही वहां की फोटोग्राफी कराने को भी कहा है।
ग्राम पंचायत केष्टा के ग्राम दऊ तोक में 30 बीपीएल और कुछ एपीएल परिवार रह रहे हैं। इन पर भूधंसाव का कहर टूटता जा रहा है। भूधंसाव से उनकी सैकड़ों नाली कृषि नष्ट हो चुकी है। इस बारे में ग्रामीण समय-समय पर शासन- प्रशासन को अवगत करातेरहे हैं। लेकिन कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। सात अक्तूबर 2010 को तत्कालीन एसडीएम गिरीश चंद्र गुणवंत ने क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण भी किया था।
दूसरी ओर भूधंसाव से ह्यूंदा तोक में अनुसूचित जाति के चार परिवार बेघर हो चुके हैं। उनके मकान भूधंसाव की भेंट चढ़ गए हैं। लेकिन इन परिवारों को अन्यत्र बसाने की कार्रवाई नहीं हुई। भाजपा दुगड्डा मंडल के महामंत्री चंडी प्रसाद कुकरेती ने कहा कि ग्राम दऊ, गवाण, टुण्या, कैराकाटल, खलेक और पुंडली गांवों में भूधंसाव से परेशानी है। इसके निरीक्षण के लिए भूगर्भ वैज्ञानिकों को भेजा जाना चाहिए। वहीं पीड़ित परिवारों की मदद की जानी चाहिए। इस संबंध में उन्होंने एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा है।

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