रच्चू’ के बिना डोली में कैसे बैठेगी रश्मि

Pauri Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
दुगड्डा। आमसौड़ में बीरेंद्र सिंह का परिवार किसी शरणार्थी की तरह रह रहा है। झवाणसार का अपना घर फिलहाल छोड़ दिया है। छोटी बेटी रचना की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। चुनौती रचना की मौत के बाद और बढ़ गई है। दो महीने बाद रचना की बड़ी बहन रश्मि की बारात आनी है। इस मन:स्थिति में शादी की तैयारी हो भी तो कैसे। रचना को इंसाफ दिलाने के संघर्ष से भी यह परिवार पीछे नहीं हटना चाहता है। शादी तो होगी, मगर रचना के बगैर कैसे सब कुछ होगा, यह सोचकर पूरा परिवार उदास हो जाता है। बड़ी बहन रश्मि समझ नहीं पा रही है कि अपनी प्यारी छोटी बहन ‘रच्चू’ के बगैर वह कैसे डोली में चढ़ पाएगी।
झवाणसार के गरीब परिवार की बेटी रचना की जिस परिस्थिति में मौत हुई है, उससे पूरा गांव स्तब्ध है। बैठकों और आंदोलनों का दौर जारी है। ग्रामीण कंधे से कंधा मिलाकर इंसाफ के लिए संघर्षरत है। झवाणसार से एकदम सटे आमसौड़ गांव में पूरा परिवार किराये के मकान में रह रहा है। परिवार का मुखिया बीरेंद्र सिंह इस कदर टूट चुका है, कि कोई काम नहीं कर पा रहे हैं। मेहनत मजदूरी करके किसी तरह दाल रोटी अब चल रही थी, मगर मासूम बच्ची की मौत ने सब कुछ छीन लिया। रचना की मां गुड्डी देवी काटल के प्राथमिक विद्यालय में भोजन माता है। वहां से जो भी पैसा मिलता है, उसी से घर का खर्चा चल रहा है। झवाणसार गांव से आमसौड़ शिफ्ट होने के बाद विद्यालय जाने की दूरी दो किमी तक हो गई है। हर दिन विद्यालय आने जाने की दिक्कतें हो रही है। रचना के मां और पिता बेटी के लिए इंसाफ चाहते हैं। बहुत कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है, मगर उनके चेहरे के भाव बताते हैं कि बेटी तो खो दी, मगर उसकी हत्या का मामला यूं ही दबा न रह जाए। दोषियों को कड़ी सजा मिले।
रचना की बड़ी बहन रश्मि के अनुसार, रच्चू पढ़ाई में सामान्य थी। घर में भी वह किसी से अधिक बातें नहीं करती थी। कुछ समय से वह गुमसुम रहने लगी थी। मगर कोई नहीं भांप पाया कि उसके साथ कैसी अनहोनी होने वाली है। कोटद्वार में रहने वाले रचना के चाचा नरेंद्र सिंह को इस बात का अफसोस है कि नौ अगस्त को क्यों उसने रचना को अकेले ही जाने दिया। उन्हें भी उसके साथ उस दिन गांव जाना था, लेकिन व्यस्तता के कारण कार्यक्रम टाल दिया था। इसके बाद ही रचना गायब हो गई थी और 13 अगस्त को उसका शव जंगल से बरामद किया गया था।

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