सौ साल से ज्यादा पुरानी रामलीला की तैयारी

Pauri Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
लैंसडौन। छावनी नगर लैंसडौन में इस बार 108 वीं रामलीला मंचन की तैयारी जोरों पर चल रही हैं। सौ साल से अधिक पुरानी इस रामलीला में वहां रहने वाले सभी धर्मों के लोग हिस्सा लेते हैं।
रामलीला मंचन को सफल बनाने के लिए रामलीला कमेटी की बैठक की गई। इसमें रामलीला मंचन के लिए निर्देशक बतौर प्रेम बहादुर थापा और सह निर्देशक मनोज बाधवा को सर्वसम्मति से चुना गया। रामलीला के लिए उपयुक्त कलाकारों की चयन प्रक्रिया चल रही है। यहां पर रामलीला का प्रथम मंचन वर्ष 1902 में हुआ था। उसके बाद यह हर वर्ष निरंतर चलता रहा। वर्ष 1962 में भारत चीन युद्ध और 1994 को उत्तराखंड आंदोलन के दौरान रामलीला का मंचन नहीं किया गया। 1950 तक रामलीला के अधिकांश कलाकार व प्रबंध से जुडे़ लोग कुमाऊं के होते थे। तब यह कुमाऊंनी रामलीला के नाम से जानी जाती थी। बाद में यहीं के लोगों ने इसको अपने हाथ में ले लिया। इस रामलीला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें गढ़वाली, कुमाउंनी, बनिया, मारवाड़ी और मुस्लिम समुदाय के लोग बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। रामलीला की व्यवस्था को लेकर हुई बैठक की अध्यक्षता डा. एसपी नैथानी ने और संचालन अश्वनी कोटनाला ने किया।

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