हर कोने पर अतिक्रमण की मार, जनता बेजार

Pauri Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
दुगड्डा। नगर पालिका क्षेत्र आज अतिक्रमण की चपेट में है। शहर में हर कहीं अतिक्रमणकारियों ने कब्जे कर लिए हैं। इतना ही नहीं राष्ट्रीय राज मार्ग भी अतिक्रमण और बेतरतीब निर्माण से संकरा हो गया है। पालिका प्रशासन इस ओर आंखे मूंदे बैठा है।
शहर में हो रहे अतिक्रमण का सबसे विपरीत प्रभाव शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है। ज्यादातर अतिक्रमण मुख्य मार्ग की ओर किया जा रहा है, जबकि दुगड्डा लैंसडौन और पौड़ी सहित कई पहाड़ी क्षेत्रों का मुख्य पड़ाव यहां है। इसके चलते लैंसडौन जाने वाले पर्यटकों के वाहन अक्सर यहां फंस जाते हैं। आम आदमी की तो रोज की दिक्कत है ही। अतिक्रमण हटाने की नगर पालिका की जो भूमिका हो, मगर कई जगह परोक्ष रूप से अतिक्रमण को बढ़ावा देने में उसका हाथ भी दिखाई दे रहा है। पालिका ने कई जगह खोखे बनवाए हुए हैं, जिन्हें किराये पर दिया गया है। इन खोखों की आड़ में इसके संचालकों ने सड़क ही घेर ली है।
इन जगहों पर है अतिक्रमण
-चूनाधार के पास का क्षेत्र, मस्जिद के पास का इलाका, शहर के मुख्य चौराहे गांधी चौक आदि क्षेत्र

क्या कहते हैं लोग
-एनएच को अतिक्रमण से मुक्त रखना चाहिए, जिससे यातायात बाधित न हो, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
-आरपी डोबरियाल

-अतिक्रमण से शहर बदसूरत हो गया है। शहर में हर तरफ जाम ही जाम नजर आता है।
-एचएस रावत

-नगर क्षेत्र में हो रहे अतिक्रमण पर जल्द रोक लगाई जानी चाहिए। ताकि इस समस्या को बढ़ने से रोका जा सके।
-गजेंद्र सिंह नेगी


-एनएच पर अतिक्रमण करना कानूनन जुर्म है। इसे हटाने के लिए तैयारी की जा रही है।
-अनिल मोतियान, अवर अभियंता, एनएचए।



अतिक्रमण पर मीटिंग और सिर्फ मीटिंग
कोटद्वार। अतिक्रमण की समस्या ने यहां के ट्रैफिक का भले ही दम निकाल दिया हो और आम आदमी भारी परेशानी महसूस कर रहा हो, मगर प्रशासन सिर्फ और सिर्फ मीटिंग में मशगूल है। पुलिस और प्रशासन ने जब पहली बैठक की थी, तब लोगों का भरोसा जमा था, कि शायद अतिक्रमण पर प्रभावी अभियान चले। मगर डेढ़ महीने की कसरत का लब्बोलुआब सिर्फ ये ही निकला है, कि प्रशासन मीटिंग-मीटिंग खेल रहा है।
त्योहारों की आड़ को पुलिस और प्रशासन ने काफी समय तक अभियान ना चलाने के लिए इस्तेमाल किया। अब जबकि, सारे प्रमुख त्योहार निबट चुके हैं, तब भी पुलिस और प्रशासन के अफसरों का एक ही जवाब है कि जल्द अभियान शुरू होगा। दरअसल, स्थानीय राजनीति भी अभियान को ना चलने देने के लिए काफी हद तक जिम्मेदार बनी हुई है। सड़क और पटरियों को घेर कर बैठे लोगों के हितों के संरक्षण के लिए तुरंत फोन घनघनाने लगते हैं। पुलिस और प्रशासन राजनीतिक हस्तक्षेप को दरकिनार कर आगे बढ़ने की स्थिति में दिखाई नहीं पड़ता। नतीजतन, अतिक्रमण की समस्या पर प्रभावी चोट के रास्ते खुल नहीं पा रहे हैं।


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