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गांवों के विकास से खिलवाड़ नहीं, तो और क्या

Pauri Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
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गांव और ग्रामीण नेताओं के भाषणों के हमेशा केंद्र में रहे हैं, मगर यहां की दिक्कत की जब बात आती है, तो सब कुछ बदल जाता है। गांवों में ग्रामीणों की परेशानी दूर करने के लिए छोटे-बडे़ कोई भी अधिकारी-कर्मचारी आगे आने को तैयार नहीं है। बीरोंखाल विकासखंड का मामला देखें, तो यहां इस वक्त एक भी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी मौजूद नहीं है। जिला पंचायतराज अधिकारी ने सबको पौड़ी जिला मुख्यालय बुला लिया है, हालांकि वहां भी वे सरकारी काम से ही गए हैं, लेकिन ऐसी भी क्या व्यवस्था, कि गांव में सब कुछ ठप हो गया है। यह स्थिति एक सप्ताह से बनी हुई है। ब्लाक की 102 ग्राम पंचायतों में इस वजह से विकास कार्य बंद हो गए हैं। क्योंकि ग्राम पंचायतों के निर्देश पर इन कार्यों को अमली जामा पहनाने वाले ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ही मौजूद नहीं हैं। दूसरी तरफ, यमकेश्वर की स्थिति है, जहां पर विकास कार्यों को करने वाले सेंटर यानी ब्लाक मुख्यालय की इतनी बुरी स्थिति है, कि वहां जर्जर भवनों के कारण लोग डरते हुए पहुंच रहे हैं। यहां पर काम करने वाले कर्मचारी भी डर के साए में हैं।
फार्मों की स्क्रूटनी कर रहे सारे वीडीओ
क्षेत्रों में नहीं, पौड़ी में बजा रहे हैं ड्यूटी
अमर उजाला ब्यूरो
बैजरो। विकास खंड बीरोंखाल में इस समय एक भी ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) मौजूद नहीं है। विकास खंड के सभी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी पौड़ी में डटे हुए हैं। इसके चलते क्षेत्र में ग्राम पंचायतों से जुड़े हुए काम प्रभावित हो रहे हैं। इन सभी को जिला पंचायतराज अधिकारी ने फोन कर पौड़ी मुख्यालय बुला लिया है।
विकासख्ंाड के सभी ग्राम विकास अधिकारियों को ग्राम पंचायत विकास अधिकारी पदों पर निकलीं रिक्तियों के लिए जमा फार्मों की स्क्रूटनी के काम में लगाया गया है। इनके जनपद मुख्यालय जाने से लोगों को परिवार रजिस्टर की नकल और जरूरी प्रमाण पत्र बनाने के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। बीरोंखाल विकासखंड के अंतर्गत 102 ग्राम पंचायतें आती हैं। इन सभी के विकास कार्य और अन्य काम रुके हुए हैं। क्षेत्र के ग्राम प्रधानों ने विभाग के इस फैसले की आलोचना की है। ग्राम विकास अधिकारियों को वापस बुलाने के लिए खंड विकास अधिकारी से मांग की गई है। प्रधान संघ के अध्यक्ष शीशपाल सिंह रावत ने कहा कि ग्राम विकास और प्रमाण पत्रों के लिए ग्राम विकास अधिकारी आवश्यक होते हैं। उनके नहीं होने से कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस तरह के आदेश देने वाले अधिकारियाें के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

कोट---

-निश्चित तौर पर इस स्थिति में दिक्कतें आ रही हैं। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी से बात की गई है। उनसे ग्राम विकास अधिकारियों का वापस भेजने की अनुरोध किया गया है।
आशाराम पंत, खंड विकास अधिकारी बीरोंखाल।


फोटो----

ब्लाक ऑफिस में आते हुए लगता है डर
जगह-जगह दरारें, भवन की बुरी स्थिति
अमर उजाला ब्यूरो
यमकेश्वर। यहां के ब्लाक मुख्यालय की जर्जर इमारत को देखते हुए यहां आने वाले लोगों के मन में हर वक्त डर बना हुआ है। यहां बैठकर काम करने वाले कार्मिकों की भी ये ही स्थिति है। इमारत में जगह-जगह बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हुई हैं। इस कारण यह काफी खतरनाक हो गया है।
वर्ष 1980 में द्वारीखाल ब्लाक का कुछ हिस्सा अलग करके यमकेश्वर ब्लाक बनाया गया था। यह कार्रवाई इसलिए की गई थी कि द्वारीखाल मुख्यालय यमकेश्वर के क्षेत्रों के लिए काफी दूर था। 1980 में ब्लाक मुख्यालय की स्थापना तो कर दी, लेकिन भवन नहीं होने से अस्थाई कार्यालय अमोला में खोला गया। वहां कुछ समय तक चला। इसके बाद विथ्याणी के मिलन केंद्र में कुछ दिनों तक ब्लाक मुख्यालय बनाया गया। वहां के बाद 1985-86 में यमकेश्वर में ब्लाक मुख्यालय के लिए जमीन तलाशी गई और उसका भवन बना दिया गया। 86 ग्राम पंचायतों और आठ न्याय पंचायतों वाले इस ब्लाक मुख्यालय को जिस स्थान पर खोला गया, वह स्थान सुरक्षित नहीं है। वहां पर बार-बार भूस्खलन होता रहता है। इसके चलते वहां पर भवन में दरारें पड़ीं और वे और भी चौड़ी होती जा रही हैं। इस भवन की मरम्मत में भी काफी धन खर्च किया गया, लेकिन उसका कोई लाभ नहीं मिला। शासन प्रशासन से इस भवन के स्थानांतरण की भी मांग कई बार उठाई गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। अब पुराने भवन को तोड़कर नए भवन बनाने के लिए 65 लाख रुपए रिलीज हुए हैं। मगर भवन निर्माण का कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है।

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