मंदिर के इतिहास-भूगोल की जानकारी ली

Pauri Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। धारी क्षेत्र के दौरे पर आई गंगा बेसिन अथॉरिटी की उप समिति के पांचों सदस्यों ने शनिवार को मंदिर के इतिहास भूगोल की जानकारी ली। आस्था का प्रमुख केंद्र धारी देवी का मंदिर अलकनंदा नदी पर बन रही 330 मेगावाट जल विद्युत परियोजना के डूब क्षेत्र में आ रहा है। समिति ने मंदिर को अपलिफ्ट(नींव समेत उठाकर अन्यत्र स्थापना) करने के तकनीकी तथा दूसरे पहलुओं पर भी स्थानीय लोगों की राय जानी।
पांच सदस्यीय उपसमिति ने परियोजना प्रभावितों, मंदिर के पुजारियों तथा जीवीके के तकनीकी निदेशक से वार्ता की। उन्होंने कंपनी की ओर से किए गए कार्यों का बनाए गए ड्राफ्टों से मिलान भी किया। समिति को कार्यों की प्रमाणिकता, कितना कार्य हुआ तथा आम आदमी की आस्था को कैसे बचाया जा सके, इस पर रिपोर्ट देनी है। इस मौके पर सेंटर इलैक्ट्रिसिटी अथॉरिटी आलोक गुप्ता, सीडब्ल्यूसी डिजाइन एंड इंजीनियरिंग के निदेशक प्रमोद नारायण, सीईए सदस्य मनोज सिकदर तथा सीडब्ल्यूसी के सीई डिजाइन एसकेजी पंडित शामिल थे।

मंदिर का दो सौ साल का इतिहास दर्शाया
मंदिर समिति के अध्यक्ष विश्वेश्वर पांडे ने समिति के सदस्यों से कहा कि मंदिर को 30-40 वर्ष पुराना बताना लोगों की आस्था के साथ छल है। उन्होंने मंदिर के 200 वर्ष से अधिक होने संबंधी लिखित प्रमाण दिखाए। ऐसे में अलकनंदा पर बने बांध से बनी झील ने मंदिर के अस्तित्व को संकट में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि मंदिर अपलिफ्ट होता है, तो नवरात्रों के समय आने वाले हजारों भक्तों के लिए भी स्थान तैयार किया जाए।


अपलिफ्ट होना चाहिए मंदिर: काकरन
श्रीनगर। सेंट्रल वाटर कमीशन के अध्यक्ष एसपी काकरन ने मंदिर क्षेत्र में प्रभावितों से वार्ता के दौरान कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय में मंदिर की अपलिफ्टिंग जरूरी है। वह तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। उमा भारती द्वारा मंदिर को यथावत रखते हुए बांध तैयार करने के प्रस्ताव को उन्होंने सही नहीं बताया। कहा कि जनता की आस्था सर्वोपरि है, लेकिन परियोजना में किए जा रहे कार्यों का तकनीकी निरीक्षण बेहद जरूरी है। परियोजना प्रभावितों और मंदिर के पुजारियों ने कहा कि मंदिर के लिए भाजपा नेता उमा भारती द्वारा दिया प्रस्ताव राजनीति से प्रेरित है। धारी देवी मां श्मशानी देवी है। इसलिए मंदिर आगे से खुला होना चाहिए। जिससे धारी गांव का पैतृक घाट मंदिर के सम्मुख रहे।

परियोजना प्रभावितों ने सौंपे ज्ञापन
श्रीनगर। परियोजना प्रभावितों ने गंगा बेसिन रिवर अथॉरिटी के अध्यक्ष बीके चतुर्वेदी को ज्ञापन भेजे।
केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष एसपी काकरन के सौंपे ज्ञापन में श्रीनगर-चौरास जल विद्युत परियोजना प्रभावित संघर्ष समिति ने कहा है कि परियोजना का 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। कार्यदायी संस्था गांव-गांव में पेयजल, रास्तों का निर्माण, पानी की टंकी, सिलाई-बुनाई केंद्र, कंप्यूटर सेंटर, स्कूल आने-जाने की लिए बस, प्रभावितों को कार्य तथा लगभग 1 हजार लोगों को रोजगार दिया है। उन्होंने परियोजना पर शीघ्र कार्य कराने की बात कही। इस मौके पर संगठन अध्यक्ष रविंद्र सिलवाल, गणेश भट्ट, प्रताप भंडारी, राकेश बिष्ट, वीरेंद्र भट्ट, कीर्तिराम जुगराण, सतेंद्रसिंह बर्त्वाल आदि उपस्थित थे।

टीम के सदस्यों ने माना बहुत हो गया है काम
श्रीनगर। गंगा बेसिन रिवर अथॉरिटी की उपसमिति की पांच सदस्यीय टीम के सदस्यों ने स्वीकार किया कि श्रीनगर जल विद्युत परियोजना में बहुत अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है। मीडिया से सीधे वार्ता में उन्होंने यह बात कही।

गैर कानूनी हुआ काम
श्रीनगर। परियोजना को श्रीनगर, श्रीकोट तथा आस-पास के गांवों सहित धारी देवी और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा मान रहे परियोजना प्रभावितों ने उपसमिति के सदस्यों से मुलाकात कर अपने तर्क बताए। उन्होंने कहा कि परियोजना का निर्माण भले ही अधिक हो गया हो, लेकिन यह गैर कानूनी है। 30 जून 2011 को परियोजना पर धारा पांच के तहत रोक लगाई गई। जबकि अक्तूबर 2011 तक अलकनंदा नदी पर बैराज बना ही नहीं था। ऐसे में कार्य रोके जाने के दौरान बना बैराज या धारी देवी क्षेत्र में हुआ निर्माण कार्य अवैध है। प्रतिनिधिमंडल में बुद्धिबल्लभ चमोली, विपिन मैठाणी, प्रकृति पर्यावरण संस्थान की अध्यक्ष बीना चौधरी, धारी देवी मंदिर बचाओ संघर्ष समिति के महासचिव अनुज जोशी आदि शामिल थे।

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