आपदा ने रुलाया, सरकार ने भुलाया

Pauri Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
आपदा आकर चली गई, मगर रोजाना के लिए तकलीफ देकर चली गई। तकलीफ इस बात पर और बढ़ जाती है, कि आपदा ने रुलाया, तो सरकार ने भुला दिया है। पहाड़ में एक तो पहले ही जीवन कठिन है। पैदल कई-कई किलोमीटर चलना पड़ता है। जहां सड़कें बनी भी हैं, वे आपदा के बाद टूटकर खतरनाक स्थिति में आ गई है। इन स्थितियों में उन पर से होकर गुजरना मुश्किल है। तमाम लोग जान जोखिम में डालकर इन सड़कों पर से निकल रहे हैं। जहां लोग जोखिम नहीं उठा रहे, वहां तकलीफ तयशुदा है, क्योंकि मोटर मार्ग बंद हैं और आने जाने का कोई दूसरा रास्ता उपलब्ध नहीं है। सरकार को ऐसे मामले में तेजी दिखानी चाहिए थी, मगर उसकी काम करने की रफ्तार से सब वाकिफ हैं। आपदा के मामले को भी सरकारी सिस्टम तेजी से लेने को तैयार नहीं है।

एक महीने से बंद पौखाल-मंाडई मार्ग
कोटद्वार। पहाड़ी क्षेत्र में हो रहे भूस्खलन ने जगह-जगह मार्ग अवरुद्ध कर दिए हैं, जिससे आम जन जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ऐसा ही कुछ हाल है दुगड्डा-काण्डी मार्ग के बीच के पौखाल-मंाडई मार्ग का, जो पिछले एक माह से बंद पड़ा है, परंतु प्रशासन की तरफ से इसे खोलने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
मार्ग अवरुद्ध होने के कारण क्षेत्र के करीब पंद्रह गंाव प्रभावित हो रहे हैं। सड़क में जगह-जगह पड़े मलबे के चलते वाहनों की आवाजाही रुक गई है। इसके चलते राशन, स्वास्थ्य व अन्य दैनिक सुविधाएं लोगों को नहीं मिल पा रही है। क्षेत्र के मदन मोहन काला का कहना है कि मार्ग बंद होने के चलते सरकारी राशन की दुकान भी बंद पड़ी है। वहीं वाहनों के न चलने से मरीजों की चिकित्सा व अन्य जरूरी कामों के लिए लोग कहीं जा नहीं पा रहे हैं। क्षेत्र के ही चंद्र सिंह रावत ने कहा कि सड़क अवरुद्ध होने से क्षेत्र के मयड्डा, सौदयल थार, अमोला, विजनूर, धूरा, मंज्याड़ी, सौड़, पाली आदि गंाव प्रभावित हो रहे हैं। अपनी समस्या को लेकर ग्रामीणों ने लोनिवि के अधिशासी अभियंता व उपजिलाधिकारी को ज्ञापन दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही मार्ग को सही नहीं किया गया तो क्षेत्र के लोग अंादोलन करेंगे। ज्ञापन में गोवर्धन काला, कैलाश कुकरेती, गणेश चंद्र डबराल, शंाती देवी, इंद्रमणी मैठाणी आदि के हस्ताक्षर हैं।

नयार घाटी की सड़कों पर असुरक्षा का घेरा
सतपुली। नयारघाटी क्षेत्र की दर्जनों सड़कें यातायात हेतु खतरनाक हो गई हैं। अनेक जगहों पर मलबा आने से ये इस कदर संकरी हो चुकी हैं, कि इन सड़कों पर यात्री जान जोखिम में डालकर यात्रा करने का मजबूर हैं। नजीबाबाद-बुवाखाल नेशनल हाईवे 534 पर चौंदकोट जनशक्ति तिराहे के पास सड़क का एक बड़ा हिस्सा ढह गया है, जबकि बाकी किसी भी वक्त ढह सकता है।
क्षेत्र के सतपुली-दुधारखाल, सतपुली-कांडाखाल-सिसल्डी, सतपुली-ओडल, सतपुली-उखलेत, सतपुली-संग्लाकोटी-बैजरो, सतपुली-व्यासचट्टी-देवप्रयाग, सतपुली-डांडानागराजा, सतपुली-पाटीसैंण समेत अनेक मार्ग यात्रा के लिए असुरक्षित हो गए हैं। लोनिवि की जेसीबी मशीनों द्वारा इन सड़कों से मलबा तो हटाया जा रहा है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर किसी तरह से गाड़ियों के निकलने लायक ही रास्ता बनाया जा रहा है। इन स्थानों पर दुर्घटना की आशंका बनी हुयी है। क्षेत्रीय ग्रामीण मोहन सिंह रावत(मोलखंड़ी), अनिल रावत (कांडाखाल कौडिया), सुरेंद्र रावत (सेडियाखाल), लाला सिंह भंडारी (पोखड़ा) आदि का कहना है कि स्थिति खतरनाक है। लोगों को कभी भी जान-माल का बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। लोनिवि को इन स्थानों से मलबा पूरी तरह हटाने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

गड्ढों में बदली सड़कें, आवाजाही मुश्किल
यमकेश्वर। ब्लाक की सड़कों की हालत गड्ढों के रूप में दिख रही है। न तो विभाग और न सरकार ही इस ओर ध्यान दे रही है। इससे लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
भृगुखाल, काण्डी, दमराड़ा, भड़ैत, मल्लीखेत, विनक, पंपाखाल, दीउली, और पीपल कोटी में तो सड़क कम गड्ढे ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। वहीं क्षेत्र का दुगड्डा-काण्डी-लक्ष्मणझूला मोटर मार्ग, जो कि कोटद्वार को जोड़ने वाला एकमात्र मोटर मार्ग है, उसकी हालत अब और भी बदतर हो गई है। दुगड्डा से काण्डी मोटर मार्ग का डामरीकरण वर्ष 1985-86 में हुआ था। वहीं काण्डी से दुगड्डा मोटर मार्ग का डामरीकरण वर्ष 2006-07 में हुआ था, लेकिन डामरीकरण के बाद से ही सड़कें टूटना शुरू हो गई थीं। जब काण्डी-लक्षमणझूला मोटर मार्ग का डामरीकरण चल रहा था, उस समय तत्कालीन गढ़वाल सांसद भुवन चंद्र खंडूरी ने पंपाखाल से पीपलकोटी के पांच किमी के लिए सांसद निधि से बजट दिया था। अब उस पांच किमी हिस्से की सड़क की हालत और भी खराब हो चुकी है। वर्ष 2010 में विभाग की ओर से डामरीकरण के लिए कुछ बजट स्वीकृत किया गया था, उसमे काम भी हुआ, लेकिन बारिश के समय कार्य होने के कारण वह जल्दी उखड़ गया। वर्ष 2011 में मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने क्षेत्र का दौरा करके सड़कों को ठीक करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी भी हालत जस की तस है।

कोट---
-मार्गों की हालत को सुधारा जाएगा। बारिश के बाद लोनिवि की सड़कों की मरम्मत होगी। वहीं दुगड्डा-कांडी-लक्ष्मणझाूला मोटर मार्ग का कार्य एडीबी के नाम प्रस्तावित है। इसका कार्य एडीबी की ओर से किया जाएगा।
-पीएस मार्तोलिया, अधिशासी अभियंता, लोनिवि, दुगड्डा

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