प्रस्तावित भूमि की कंटूर मैपिंग से होगी जांच

Pauri Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
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श्रीनगर। सुमाड़ी में एनआईटी के लिए प्रस्तावित भूमि की निर्माण के लिए उपयुक्तता जानने के लिए कंटूर मैपिंग का सहारा लिया जाएगा। किसी भी क्षेत्र या धरातल की समानता नापने के लिए अपनाई जाने वाली इस विधि का उपयोग करके यह जानकारी मिल सकेगी कि सुमाड़ी में निर्माण कार्य के योग्य कुल कितने प्रतिशत भूमि है।
सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रधान वैज्ञानिक डा.शांतनु सरकार के प्रतिनिधित्व में सुमाड़ी पहुंची तीन सदस्यीय टीम ने सुमाड़ी की भूमि का मौका मुआयना किया। इस मौके पर सुमाड़ी के ग्रामीणों द्वारा दान में दी गई 120 हेक्टेयर भूमि का पूरी तरह आंकलन किया गया। टीम ने माना कि एनआईटी के लिए अंतिम निर्णय से पूर्व प्रस्तावित भूमि की संपूर्ण मैपिंग कर समतल भूमि का आंकलन करना चाहिए, ताकि प्रस्तावित भूमि की उपयुक्तता का सही-सही अनुमान लगाया जा सके।
इस मौके पर डा.शांतनु सरकार के साथ भूतत्व एवं खनिकर्म उद्योग निदेशालय के उप निदेशक डीडी प्रताप, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता दयानंद, एनआईटी निदेशक डा.एचटी थोराट, उपजिलाधिकारी रजा अब्बास व राजस्व विभाग के कर्मी मौजूद थे।

क्या है कंटूर मैपिंग
समुद्र तल से समान ऊंचाई वाली रेखाओं को कंटूर रेखाएं कहते हैं। जो किसी धरातल के समान ऊंचाई वाले भागों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखाएं होती हैं। सुमाड़ी की प्रस्तावित भूमि पर समान व असमान धरातल की बनावट के साथ ही ढाल तीव्र है या कम, इसकी जानकारी लेने में कंटूर मैपिंग सहायक साबित होगी, जो प्रस्तावित भूमि के बाह्य स्वरूप की जानकारी देगा।

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