सरकारी तंत्र की भेंट चढ़ा अच्छा-खासा घराट

Pauri Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
कोटद्वार। कलालघाटी उदयरामपुर में बने वर्षों पुराने आटा पीसने वाले घराट को जब से मॉडल रूप दिया गया, तब से यह बंद पड़ा है, जबकि इससे पहले वह अच्छी तरह से चलता था। घराट का पिसा आटा खाने वाले लोगों को मजबूरी में अब आटा चक्की का ही सहारा लेना पड़ रहा है।
कलालघाटी में स्थित सालों अच्छा खासा चलने वाला पुराना घराट अचानक सरकार की नजर में आ गया। वर्ष 2005-06 में उत्तरांचल अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) से इसे नया रूप दिया। जब से उरेडा ने इसको मॉडल घराट का रूप दिया, तब से यह चल नहीं पाया है। यहां तक कि इसको ट्रायल के लिए भी नहीं चलाया गया। सिंचाई विभाग के अंतर्गत आने वाले इस घराट को मॉडल रूप देने के लिए 2.50 लाख रुपए खर्च किए गए। इस घराट को स्थानीय व्यक्ति संचालित करता था। इसके बंद होने से उसका रोजगार भी छिन गया।


कैसे बना मॉडल घराट
-इस घराट को मॉडल रूप देने के लिए पहले तो इसकी चक्की के पार्ट्स बदले गए। उसमें नए पार्ट्स लगा दिए गए। पुराने भारी भरकम पार्ट्स की जगह पर हल्के पार्ट्स लगाए गए। इसके भवन को नया रूप दिया गया। बाहर बैठने के लिए बैंच आदि बना दिए गए। योजना के तहत मॉडल घराट बनने के बाद इसको अधिक तेजी से चलना था। इसके अलावा इससे कुछ किलोवाट बिजली का उत्पादन भी किया जाना था, लेकिन यह कुछ भी नहीं हो सका।

घराट के आटे की डिमांड
-इलेक्ट्रानिक चक्की में पिसे आटे से अधिक लोग घराट में पिसा आटा ज्यादा पसंद करते थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलेक्ट्रिक चक्की में आटा जल जाता है। जबकि घराट में उसकी शुद्धता बनी रहती है। घराट में देर से सही लेकिर शुद्ध आटा निकलता है।

गनीमत है यहां नहीं हुआ यह प्रयोग
-लोगों का कहना है कि उरेडा की ओर से जिस घराट को मॉडल रूप नहीं दिया गया वह आज भी सही सलामत चल रहा है। मवाकोट में बना घराट आज भी अच्छी तरह से चल रहा है। यह आज भी पारंपरिक तरीके से ही काम कर रहा है।


लोगों का कहना
-जब से यह मॉडल घराट बना तब से बंद है। घराट में पिसा आटा इलेक्ट्रानिक चक्की में पिसे आटे से लाख गुना अच्छा होता है। इसको लोग काफी पसंद करते हैें।
-दिनेश गौड़

-अच्छे खासे चल रहे घराट को मॉडल रूप देने के चक्कर में बंद कर दिया। पहले जैसे रहता तो कम से कम चलता तो रहता।
- कैलाश चंद्र डोबरियाल


-कई बार उरेडा को इस घराट को सिंचाई विभाग को सौंपने के लिए चिट्ठी लिखी है, लेकिन वह इसको हमारे हैंडओवर नहीं कर रहे हैं। वहां पर कुछ भी इस तरह का सामान नहीं है जिससे इसको चलाया जाए। यदि सामान दिखाकर हमको सौंपते हैैं तो इसको चलाया जा सकता है।
-आरएस आर्य, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग

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