आपदा से बचने के लिए बनें प्राकृतिक बांध

Pauri Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। प्राकृतिक आपदाओं के विनाश से बचने के लिए प्राकृतिक बांधों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पलायन को रोकने के लिए स्पष्ट नीति व उसके क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार करने के लिए सरकार को प्रतिबद्ध होना होगा। सामाजिक सरोकारों के लिए चिंतनशील संगठनों को सरकार पर हिमालय को बचाने और बसाने के लिए दबाव डालना चाहिए। ये बातें हिमालय बचाओ आंदोलन से जुड़े प्रमुख आंदोलनकारियों ने पत्रकार वार्ता में कहीं।
आंदोलनकारी कृष्णानंद मैठाणी और जगदंबा प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि आंदोलन के 20 वर्ष पूरे होने पर टिहरी में ‘उत्तराखंड को बचाने की जरूरत’ विषय पर हुई बैठक में उत्तराखंड को बचाने और बसाने की जरूरत पर जोर देते हुए 24 बिंदुओं का एक एजेंडा तैयार किया गया। जिसमें प्राकृतिक बांध की जरूरत, नए सिरे से भू-प्रबंधन और ऊर्जा नीति बनाए जाने की जरूरत पर अधिक बल दिया गया। उन्होंने कहा कि हिमालय बचाओ आंदोलन में सभी को भूमिका निभानी चाहिए। इस मौके पर मुजीब नैथानी ने कहा कि उत्तरकाशी की आपदा में अनेकों युवाओं के प्रमाण पत्र बह गए हैं ऐसे में शीघ्रातिशीघ्र उनके प्रमाण पत्र बनाने में सरकार को सहयोग करना चाहिए। इस मौके पर समीर रतूड़ी और सुशील चमोली भी उपस्थित थे।

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