लैंसडौन के पहाड़ पर भी खनन से खतरा

Pauri Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
लैंसडौन। पर्यटन नगरी लैंसडौन में भी अवैध खनन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। यहां पर चट्टानों को काटकर पत्थर निकलने का काम खुले आम चल रहा है। लेकिन इस संबंध में प्रशासन ने आंख पर पट्टी बांधी हुई है। खनन और लगातार बारिश से चट्टान का यह हिस्सा लगातार कमजोर हो रहा है। इससे भूस्खलन की आशंका गहरा गई है।
छावनी परिषद के सदस्य इस मामले में मुखर हो गए हैं। छावनी परिषद के सदस्यों ने इस संबंध में सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के लिए पुरस्कृत नगर में इस तरह का अवैध खनन गंभीर मामला है। छावनी परिषद की उपाध्यक्ष उषा नैथानी ने बताया कि नगर के नजदीकी दो गदेरों में नालों का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए नजदीकी पहाड़ी से चट्टान काटकर पत्थरों को निकाला जा रहा है। लगातार हो रही बारिश से इन पहाड़ियों का यह हिस्सा कमजोर हो गया है। परिषद के सदस्यों ने कहा कि छावनी परिषद, स्थानीय प्रशासन, वन विभाग की ओर से इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार गढ़वाल राइफल को पर्यावरण के क्षेत्र में नगर में उल्लेखनीय कार्य के लिए दिया गया था। सदस्यों का कहना है कि विभाग तो इस संबंध में चुप बैठे ही हैं लेकिन सेना भी इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। इस खनन से इस पर्यटन नगरी को खतरा बना हुआ है। परिषद के सदस्य महिपाल रावत, अश्वनी कोटनाला और नाहिदा रहमान ने प्रशासन से इस पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
इस संबंध में एसडीएम पीएल शाह का कहना है कि उनके पास इस संबंध में कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं छावनी परिषद के अधिकारियों का कहना है कि उनके संज्ञान में अवैध खनन का कोई मामला नहीं है। यदि कोई मामला सामने आता है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

खनन करने वालों के आगे विभाग बेबस
कोटद्वार। खनन करने वालों के आगे वन विभाग और प्रशासन बेबस बना हुआ है। नदियों में खनन होते हुए आम आदमी हर वक्त देख रहा है, मगर सोमवार को जब सरकारी महकमे की टीम ने कोशिश की, तो सिर्फ दो ट्रैक्टरों को ही पकड़ा जा सका। बचने के लिए विभाग कह रहा है कि उनकी तरफ से पूरी कोशिश हो रही है, लेकिन ऐसे लोग मुश्किल से ही पकड़ में आ पा रहे हैं।
सोमवार को टीम ने सुखरौ नदी से दो ट्रैक्टर पकड़े, जिनको वन अधिनियम के तहत कार्रवाई करके बंद कर दिया गया है। ट्रैक्टर स्वामियों पर मुकदमा दर्ज करके उन पर कार्रवाई की जा रही है। ट्रैक्टरों को वन विभाग कोटद्वार के पनियाली स्थित रेंज कार्यालय में खड़ा करा दिया गया है। अवैध खनन की जानकारी होने पर वन विभाग की टीम वन क्षेत्राधिकारी जगदीश प्रसाद कुकरेती के नेतृत्व में सुखरो क्षेत्र की ओर गई। जहां पर दो टैक्ट्रर पकड़ में आ गए। संबंधित विभाग भले ही अभियान को लेकर अलग तर्क दे रहा हो, लेकिन आम आदमी यह मानने को तैयार नहीं कि खनन करने वाले पकड़ में नहीं आ रहे हैं। उनका आरोप है कि ऐसे लोगों को विभाग का संरक्षण प्राप्त है।

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