सरकार बना दो पुल, जान जोखिम में ना डालो

Pauri Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
बरसात में यहां की नदियां उफान पर हैं। जब पानी कम रहता है, तो लोग इसे यूं ही पार कर लेते हैं। मगर उमड़ती घुमड़ती नदियों के कारण बरसात में ये संभव नहीं है। ऐसे में या तो कई किमी दूसरे रास्ते को पकड़कर लोग घर तक पहुंच रहे हैं या फिर नदी के बहाव के कम होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे लोगों की भी कमी नहीं, जो जान जोखिम में डालकर नदी के रास्ते निकल रहे हैं। सरकार से ये लोग पुल बनाने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। मगर कोई सुनने वाला नहीं है। पुल बना होता, तो जान जोखिम में डालने की नौबत भी नहीं आती। ऐसे में लोगों की ये ही पुकार निकल रही है। सरकार बना दो पुल, जान जोखिम में ना डालो। देखने वाली बात यह है कि सरकार इस पुकार को कब सुनती है।
कहां-कहां पर है दिक्कत
1-कोटद्वार-कालागढ़ मार्ग के बीच में सनेह क्षेत्र में बहने वाली कोटड़ी नदी पर पुल नहीं होने से लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। नदी का पानी कम होने के इंतजार करने के अलावा लोगों पर कोई विकल्प नहीं रहता। यहां पर लोग काफी समय से पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन कार्बेट क्षेत्र होने के कारण इसमें दिक्कत है।

2-लकड़ी पड़ाव और ग्रास्टनगंज के बीच में अग्निशमन कार्यालय के पास खोह नदी में वर्षों से मोटर पुल की मांग चल रही है। पुल के नहीं होने से लोगों को सिद्धबली की ओेर से कई किमी अतिरिक्त चलकर अपने घरों तक पहुंचना पड़ता है। बरसात में लोग नदी पार करने की कोशिश करते हैं, तो उनकी जान का जोखिम बना रहता है।

3-शिवपुर और कण्वाश्रम मार्ग पर बीच में घराट के पास बरसाती सुखरौ नाला बहता है। यहां पर सालों से पुल की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक पुल नहीं बना है। इस मार्ग से कण्वाश्रम की दूरी बाजार से काफी कम हो जाती है। बरसात में यह पैदल चलने लायक भी नहीं रह जाता है।


क्या है लोगों का कहना
-सुखरौ नाला पर पुल बनने से कण्वाश्रम क्षेत्र से बाजार की दूरी काफी कम हो जाएगी। लोगों को इससे काफी फायदा मिलेगा। -शिव प्रसाद डबराल

-कोटड़ी नदी पर पुल बनना जरूरी है। नदी बढ़ने पर दोनों ओर दर्जनों वाहन खड़े हो जाते हैं। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। -सोबन सिंह बजेठा

-कोटड़ी पर तो कई बार पुल बनाने की मांग उठी है, लेकिन आज तक पुल बनाया नहीं गया। -विक्रम सिंह कंडारी

कोट---

-कोेटड़ी नदी का यह क्षेत्र कार्बेट जोन में आता है। भारत सरकार से अनुमति मिलेगी तब ही इस पर पुल बन सकता है। ग्रास्टनगंज और लकड़ी पड़ाव में झूला पुल का प्रथम फेस का काम स्वीकृत है, लेकिन लोग यहां पर मोटर पुल की मांग कर रहे हैैं। इसको स्वीकृत होने में समय लगेगा।
-पीएस मार्तोलिया, अधिशासी अभियंता लोनिवि दुगड्डा

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