1971 से अब तक अधूरी पुनर्वास की मंाग

Pauri Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
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कोटद्वार। ग्राम पुलिंडा के लोग सन् 1971 से अब तक पुनर्वास की मांग करते चले आ रहे हैं, लेकिन उनकी मांग अब तक नहीं पूरी हुई। यह मांग प्रदेश के पूर्व मंत्री रहे जगमोहन सिंह नेगी के कार्यकाल में भी की गई थी, जिसके तहत खाम स्टेट भूमि पापीडांडा के लिए आदेश हुए थे, लेकिन लोगों में एक राय नहीं होने के कारण आदेश का पालन नहीं हो सका। आज उसी भूमि पर फिर से जनता पुलिंडा गांव को बसाने की मांग कर रही है।
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इस क्रम में वर्ष 2006 में तत्कालीन मंडलायुक्त गढ़वाल मंडल सुभाष कुमार एवं जिलाधिकारी पौड़ी एनएस नेगी ने इस भूमि का निरीक्षण किया था। साथ ही इस भूमि को पुलिंडा के लिए उपयुक्त बताया था। इस पर तत्कालीन डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग निशांत वर्मा ने आयुक्त को इस भूमि को निर्विवाद होने की रिपोर्ट दी थी। साथ ही कहा था कि इसमें गांव को बसाया जा सकता है। इस प्रक्रिया के तहत 2006 में ही तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने भी प्रमुख सचिव राजस्व को गढ़वाल आयुक्त की संस्तुति पर शीघ्र ही कार्रवाई करने के आदेश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद पुनर्वास नहीं हो सका। वर्तमान में भी पुलिंडा के विस्थापन की फाइल फिर से जिलाधिकारी की ओर से शासन को भेजी जा चुकी है।
ग्राम पुलिंडा के विस्थापन को लेकर बनी संघर्ष समिति के अध्यक्ष केशर सिंह नेगी की ओर से कहा गया कि मांग पर कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण अपने क्रमिक धरने को आमरण अनशन में तब्दील कर देंगे। आंदोलन के 48 वें दिन जमनोत्री देवी और सुशीला देवी अनशन पर रहीं।।
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