शासन का सुस्त रवैया, मेडिकल कालेज पर भारी

Pauri Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
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श्रीनगर। आने वाले महीनों में मेडिकल कालेज में मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया की ओर से निरीक्षण होना है। इससे पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी होनी जरूरी है। ऐसा न होने पर कालेज की मान्यता खटाई में पड़ सकती है। बावजूद इसके शासन से मेडिकल कालेज प्रशासन को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। निरीक्षण से पहले फैकल्टी के पूरे होने में भी अंदेशा है। कारण दो-दो बार साक्षात्कार होने के बावजूद पदोन्नति सूची जारी नहीं होने जैसे कारण हैं।
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श्रीनगर मेडिकल कालेज भले ही प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। लेकिन शासन स्तर से इस कालेज के हित में त्वरित निर्णय नहीं हो पा रहे हैं। भले ही इसके पीछे शासन स्तर पर अधिकारियों के दायित्वों में लगातार हुए बदलावों को कारण गिनाया जा रहा हो, लेकिन तस्वीर का एक पहलू यह भी है कि छह महीने से मेडिकल कालेज के डाक्टर दो-दो बार साक्षात्कार देने के बाद भी पदोन्नति के इंतजार में ही हैं। साक्षात्कार दे चुके 20 में से अभी सिर्फ मेडिसन विभाग के डा.कलम सिंह बुटोला का प्रमोशन लैटर ही पहुंचा है। कालेज प्रशासन इस संदर्भ में डाक्टरों को कुछ भी बताने में असमर्थता जाहिर कर चुका है। ऐसे में डाक्टर प्रमोशन को लेकर असमंजस में हैं। कई विभागों में फैकल्टी पूरी नहीं है। ऐसे में प्रमोशन नहीं मिलने पर यदि कुछ डाक्टरों ने मेडिकल कालेज को बाय-बाय बोल दिया तो एमसीआई के निरीक्षण के दौरान समस्या खड़ी हो सकती है।
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