लकड़ी-खरपतवार जुटाइए, बिजली तैयार

Pauri Updated Sat, 11 Aug 2012 12:00 PM IST
कोटद्वार। बिजली के मौजूदा संकट से प्रदेश ही नहीं, दूसरे राज्य भी गुजर रहे हैं। बिजली पर मची जंग के बीच बांस एवं रेशा परिषद ने गेसीफायर मशीन से यहां बिजली का उत्पादन शुरू कर दिया है। बस, लकड़ी और खरपतवार लाइए और बिजली तैयार। 25 किलोवाट तक बिजली उत्पादन इससे किया जा सकेगा। दिल्ली से आए इंजीनियर ने इसका शुक्रवार को सफल टेस्ट किया, तो वैकल्पिक ऊर्जा के एक नए स्रोत का रास्ता साफ हो गया।
केंद्र सरकार की ओर से नेशनल मिशन एंड बैंबो एप्लीकेशन के तहत यह मशीन यहां पर लगाई गई है। प्रदेश में इस तरह का पहला बिजली उत्पादन संयंत्र स्थापित किया गया है। यहां पनियाली स्थित बांस एवं रेशा परिषद के केंद्र में लगी इस मशीन की कीमत 22 लाख है। इस मशीन स्टार्ट करने के लिए पांच किलोवाट बिजली की जरूरत पड़ती है। शुरू होने के आधे घंटे के बाद यह खुद की बिजली से ही चलने लगता है। फिलहाल इस मशीन की बिजली को इसी केंद्र की अन्य मशीनों को चलाने के उपयोग में लाया जा रहा है।

क्या है खासियत
-गेसीफायर मशीन 10 किलो वाट से लेकर दो मेगावाट तक बिजली उत्पादन की क्षमता रखती है। कोटद्वार में 25 किलो वाट तक बिजली मिलेगी। यानी कि 100 वाट के ढाई सौ बिजली के बल्व एक बार में आसानी से जलाए जा सकते हैं। इस मशीन में एक किलो वाट बिजली बनाने के लिए एक किलो दो सौ ग्राम लकड़ी एक घंटे के लिए चाहिए।

खर पतवार से भी बनती है बिजली
-इस मशीन से बिजली सिर्फ लकड़ी से ही नहीं बनती है। लकड़ी के बुरादे, जंगल या कहीं अन्य जगह के पत्ते और खर पतवार भी काम आते हैं। सूखे पत्तों या खर पतवार को ब्रिफिडिंग मशीन में डालकर इसके गट्टे बनाए जाते हैं। इसको फिर जरूरत के हिसाब से मशीन में डाला जाता है। टुकड़ों का आकार मशीन की पावर के हिसाब से किया जाता है।

प्रदूषण रहित है मशीन
-इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस बैंगलोर के स्तर पर तैयार तकनीक पर यह मशीन बनाई गई है। यह पूरी तरह से प्रदूषण रहित है। इससे निकलने वालेे धुएं को फिल्टर किया जाता है। इससे तैयार बिजली की लागत तीन से चार रुपए प्रति यूनिट तक आती है।

साल भर बिना रुके चलने की क्षमता
-इस मशीन को चौबीस घंटे बिना रुके चलाया जा सकता है। इसके लिए इसमें पड़ने वाला फ्यूल (लकड़ी और पत्ते आदि) बराबर मात्रा में पड़ती रहनी चाहिए।

-यह मशीन पूरी तरह से प्रदूषण से रहित है। यह भविष्य के लिए वैकल्पिक ऊर्जा का सबसे अच्छा जरिया साबित हो सकती है। किसी भी लकड़ी के टुकड़े या सूखे खर पतवार इस मशीन को संचालित करने के लिए काफी हैं। इसकी बिजली अन्य किसी भी बिजली से सस्ती रहती है।
-नवीन भारद्वाज, मशीन के तकनीकी इंजीनियर

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