खनन करने वालों की प्रशासन को चुनौती

Pauri Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
कोटद्वार। नदियों में अवैध खनन यहां बदस्तूर जारी है। रात हो या फिर दिन, खनन का काम किसी वक्त रुका नहीं है। हर आदमी को खनन का यह खेल दिख रहा है, मगर प्रशासन की आंखें बंद हैं। खनन का खतरा उसे नजर नहीं आ रहा है। सिम्मलचौड़ में अभी ज्यादा दिन नहीं हुए, जब खनन का नुकसान लोगों ने उठाया था। लोगों के जेहन में यह तकलीफ अब भी ताजा है। बारिश होने पर उन्हें फिर से खतरा मंडराता नजर आ रहा है। यह स्थिति सुखरो, मालन और खोह नदी के नजदीक की तमाम बस्तियों की है। मगर प्रशासन शायद जान-माल के बडे़ नुकसान की इंतजारी में है। खनन करने वालों की प्रशासन को खुली चुनौती है। उन्हें पकड़ कर दिखा सकते होे, तो पकड़ो।
इन तीन नदियों में प्रतिदिन दर्जनों ट्रैक्टर से आधी रात के बाद से पत्थर और रेत, बजरी निकालना शुरू करते हैं। खनन के कारोबार से जुडे़ लोग सुबह नौ बजे तक खनन करते हैं। इसके चलते नदी का रुख बदल रहा है। वह बस्तियों की तरफ डायवर्ट हो रही हैं। गाड़ीघाट स्थित खोह नदी में रात दो बजे से ट्रैक्टर लेकर खनन के धंधेबाज घुस जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने विरोध किया, तो उन्हें धमकी दी जा रही है। किसी भी समय लोगों और खनन करने वालों के बीच बवाल भी हो सकता है। पहले तो दिन में ही जोरदार तरीके से खनन किया जा रहा था, लेकिन अब बारिश और रात में भी खनन जारी है। जिसके चलते खोह नहीं में खनन क्षेत्र से जुड़े मोहल्ले के लोगों को भारी दिक्कत हो रही है। गाड़ीघाट आदि क्षेत्र के लोगों को पूरी रात सिर्फ ट्रैक्टरों की आवाजाही ही सुनाई पड़ती है। वहीं इसमें न तो रात्रि गश्त की पुलिस ही कोई धर पकड़ कर रही है और न ही प्रशासन की ओर से ही कोई कार्रवाई हो रही है। लोगों ने अनेक तहसील दिवसों में भी प्रशासन को लिखकर शिकायत की है, मगर कार्रवाई नहीं की गई है।


इन जगहों पर नदियों से खतरा
-विकास नगर, गाड़ीघाट, सिम्मलचौड़, काशीरामपुर, झूला बस्ती, ग्रास्टनगंज, लालपानी, मोटाढाक, उदयरामपुर, दुर्गापुरी, सनेह-भाबर।


-अवैध खनन को लेकर उन्हें शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उनकी रोकथाम के लिए कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए औचक निरीक्षण और तेज किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है। साथ ही वे भी इसका निरीक्षण करेंगे। खनन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-अनिल गर्ब्याल, एसडीएम, कोटद्वार।

विभागों के तालमेल कोसों दूर
कोटद्वार। खनन के मामले में प्रशासन, वन विभाग और पुलिस की सबसे अहम जिम्मेदारी है, मगर आज नहीं, बल्कि बहुत पहले से इनमें तालमेल बिखरा हुआ है। इन्हें कोर्डिनेट करने की प्रशासन पर जिम्मेदारी है, लेकिन विभागों का अड़ियल रुख के आगे वह हर बार कमजोर पड़ता है। यही कारण है कि संयुक्त अभियान कभी प्रभावी ढंग से चल ही नहीं पाया है। इस मामले में कोरी बातें जरूर की गई हैं। मगर कार्रवाई नहीं हुई है।

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