भीमा ने लाठी से पीट-पीटकर मारा भूखा टाइगर

Pauri Updated Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
कोटद्वार/हरिद्वार। कोटरी रेंज के बगनाला में अंतरराष्ट्रीय शिकारी भीमा ने भूखे टाइगर को लाठी से पीट-पीटकर मार डाला था। भीमा ने सेंट्रल वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के सदस्यों को बताया कि खड़का (बाघ पकड़ने वाला उपकरण) से उसने टाइगर को पकड़ा था। कई दिन भूखा रखने के बाद जब टाइगर सुस्त पड़ गया तो उसने उसके सिर पर लाठी से कई वार करके मार डाला। वन्य जीव तस्कर भीमा ने कबूल किया कि टाइगर की जो खाल उसके पास से बरामद हुई थी, उसका शिकार उसने दो माह पहले लैंसडोन के कोटरी सनेह रेंज में किया था। लैंसडोन वन प्रभाग कार्बेट नेशनल पार्क व राजाजी नेशनल पार्क के बीच का हिस्सा है। भीमा सेंट्रल वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो सीडब्लूएलसीसीबी के सदस्यों को शिकार की जगह पर ले गया। जहां से सीडब्ूलूएलसीसीबी के सदस्यों को शिकार के उपकरण और अन्य चीजें बरामद हुई।
बीते दिनों सीबाआई व सेंट्रल वाइल्उ लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो सीडब्लूएलसीसीबी की टीम ने वन्य जीव तस्कर भीमा को गुड़गांव से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान भीमा के पास से एक टाइगर की खाल बरामद व हड्डियां बरामद हुई थीं। टीम को पूछताछ के दौरान भीमा से अहम जानकारियां मिलीं। लैंसडौन के डीएफओ नरेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि भीमा से पूछताछ की जा रही है। खटके और नमक बरामद होने के बाद से जांच का दायरा और बढ़ गया है। मामले का जल्दी ही पूरी तरह से खुलासा हो जाएगा। अभी जांच प्रक्रिया चल रही है। भीमा को लेकर टीम रविवार को मौके पर गई थी। सेंट्रल वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के सदस्यों को बरगद के पेड़ से दो खड़के, नमक बर्तन और खाने पीने का सामान बरामद हुआ। भीमा ने जांच टीम को बताया कि टाइगर का शिकार करने के लिए उसने कई दिन बरगद के पेड़ पर गुजारे।

अचानक बदला कुख्यात का मन
जांच टीम की किस्मत अच्छी थी कि अचानक कुख्यात वन्य जीव तस्कर का भीमा का मन बदल गया और वह जांच टीम को शिकार की जगह ले गया। भीमा ने रविवार को पूरे दिन जांच टीम को दिनभर जमकर छकाया। भीमा दिन भर अधिकारियों को अलग अलग जानकारी देता रहा। अधिकारियों के मुताबिक जांच टीम सुनारो से पूछताछ कर वापस दिल्ली जा रही थी। तभी जटवाड़ा पुल के पास भीमा ने सेंट्रल वाइल्ड लाइफ क्राइम ब्यूरो के इंचार्ज अरविंद झा से कहा कि मैंने ही टाइगर का शिकार किया है और में अब आपको शिकार की सही जगह ले चलता हूं।

भीमा जंगल के चप्पे चप्पे से वाकिफ
भीमा की जंगल की जानकारी देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। शिकार की जगह जाते समय रास्ते में भीमा ने अचानक गाड़ी रोकने को कहा। इस पर अधिकारियों ने भीमा ने आगे के रास्ते से चलने को कहा। जवाब में भीमा ने कहा कि साहब यह शार्टकट है। भीमा बिना रास्ता भूले जांच टीम को लेकर शिकार की जगह ले गया। अधिकारियों ने बताया कि शार्टकट रास्ता भी लगभग चार से पांच किलोमीटर लंबा था।

भीमा के खिलाफ कई मामले हैं दर्ज
राजाजी पार्क के अधिकारियों ने बताया कि कुख्यात वन्य जीव तस्कर भीमा के खिलाफ उत्तराखंड में पहला मामला वर्ष 2002 मे गांजा रखने के आरोप में दर्ज हुआ था। उसके बाद भीमा वर्ष 2005 में जाफरा में टाइगर की खाल के साथ रंगे हाथ पकड़ा गया था। बताया जा रहा है कि भीमा के खिलाफ अरुणाचल प्रदेश में चार पांच मामले दर्ज है। अधिकारियों ने बताया कि भीमा अपने सात भाइयों में सबसे छोटा है।

बावरिया नहीं राजस्थानी ठाकुर है भीमा
हरिद्वार। बावरिया गिरोह के वन्यजीव तस्कर के नाम से कुख्यात भीमा असल में बावरिया नही है। भीमा का पूरा नाम भीमा सिंह सोंलकी है और वह जिला उदयपुर राजस्थान का मूल निवासी है। बताया जा रहा है कि भीमा अपने सात भाइयों में सबसे छोटा है।

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