धारी देवी मंदिर में पहली बार टूटी परंपरा

Pauri Updated Sun, 05 Aug 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के बैराज क्षेत्र में बनी झील धारी देवी मंदिर की राह में बाधक बन गई है। शनिवार को पहले बार मंदिर में परंपरा के अनुसार सूर्योदय से पहले दीप प्रज्ज्वलित नहीं हो पाया। झील का जलस्तर बढ़ने से मंदिर में भक्तों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है।
धारी देवी मंदिर में सूर्योदय से पहले ही दीया जलाने की की परंपरा रही है। मंदिर के पुजारी सुबह चार बजे ही मंदिर परिसर में पहुंच जाते हैं। जाड़ों के दिनों में ही यह समय बदलकर पांच बजे कर दिया जाता है। लेकिन शनिवार को यह परंपरा टूट गई। मंदिर के पुजारी आपदा प्रबंधन की टीम के साथ बोट में किसी तरह सुबह नौ बजे मंदिर पहुंचे। मंदिर समिति के अध्यक्ष विश्वेश्वर प्रसाद पांडे तथा रामस्वरूप ने मंदिर में दीया जलाया तथा फिर उसी बोट से वे वापस भी लौट गए।
मंदिर समिति अध्यक्ष विश्वेश्वर प्रसाद पांडे ने बताया कि मंदिर में रुकना संभव नहीं था। रात तक मंदिर तथा कंपनी के चौकीदार वहां मौजूद थे, लेकिन जलस्तर बढ़ने पर वे यहां से चले गए। उन्होंने कहा कि मेरी उम्र 72 वर्ष हो चुकी और अपने जीवन में पहली बार परंपरा को टूटते हुए देखा। सरकार और कंपनी यही चाहते हैं, तो फिर हम कुछ नहीं कर सकते।

Spotlight

Most Read

Bihar

चारा घोटाले के तीसरे केस में लालू यादव दोषी करार, दोपहर 2 बजे बाद होगा सजा का ऐलान

पूर्व रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है।

24 जनवरी 2018

Related Videos

देहरादून में हुआ शानदार कार्यक्रम, झूमते नजर आए आम लोग

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अखिल गढ़वाल सभा की ओर से परेड ग्राउड में उत्तराखंड महोत्सव ‘कौथिग’ में पांचवे दिन लोक गायकों के गीत का जादू लोगों के सर चढ़कर बोला। लोकगायक अनिल बिष्ट, संगीता ढौडियाल, कल्पना चौहान, हीरा सिंह राणा ने समा बांध दिया।

30 अक्टूबर 2017