सिस्टम सुधारो, तभी तो चमकेंगे खेल के सितारे

Pauri Updated Sat, 04 Aug 2012 12:00 PM IST
कोटद्वार। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में खिलाड़ी हैं। उनमें प्रतिभा है, कुछ कर गुजरने की ललक भी है। मगर सिस्टम ऐसा लचर है, कि आगे बढ़ने की राह में अड़चन ही अड़चन नजर आती है। खेल गतिविधियां यहां पर कामचलाऊ सिस्टम में चल रही है। खिलाड़ियों के लिए प्रैक्टिस लायक माहौल सिरे से नदारद है। जब कहीं किसी प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को जाना होता है, तभी दो-चार दिन के लिए उन्हें कालेज से सामान मिल पाता है। प्रैक्टिस करने के लिए भी उन्हें राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम की शरण में जाना होता है।
राजकीय महाविद्यालय में जो भी छात्र-छात्राएं खेलों में अच्छा प्रदर्शन कर पाते हैं, उसके पीछे उनकी खुद की मेहनत होती है। लगभग हर तरह के खेल में यहां के छात्र-छात्राएं प्रतिभाग करते हैं। इनमें महाविद्यालय का योगदान नहीं के बराबर होता है। महाविद्यालय में हर छात्र-छात्रा से 120 रुपया प्रति वर्ष खेल गतिविधियों के नाम पर लिया जाता है। उसी पैसों से सभी खेल गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।

स्टेडियम में करते हैं अभ्यास
-महाविद्यालय में अभ्यास के लिए उचित व्यवस्था न होने से अभ्यास के लिए राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम जाते हैं। क्रिकेट खेलने वालों के लिए नेट अभ्यास की भी कोई व्यवस्था नहीं है।

व्यवस्था पर चल रहा खेल विभाग
-कालेज में स्थायी खेल अधिकारी नहीं होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था पर काम चलाया जा रहा है। महाविद्यालय में यह पद पिछले पांच सालों से खाली चल रहा है। इसका सीधा प्रभाव खेल गतिविधियों पर पड़ रहा है।

खिलाड़ियों का कहना है

- किसी भी प्रतियोगिता में जाने के लिए कालेज की ओर से कोई सहयोग नहीं मिलता है। टूर्नामेंट में जाने से दो-चार दिन पहले थोड़ा बहुत सामान दिया जाता है। उसमें कितना अभ्यास हो पाएगा। खेलों के नाम पर कालेज में सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। -सुमित बिष्ट


-कालेज की ओर से उतना नहीं हो पाता जितना होना चाहिए था। अधिकांश समय अपनी व्यवस्था पर अभ्यास करना पड़ता है। कालेज में अभ्यास की व्यवस्था होनी चाहिए।-सूरज नेगी

-क्रिकेट के अभ्यास के लिए नेट की व्यवस्था होना जरूरी है। बिना अभ्यास के कहीं पर भी अच्छा प्रदर्शन नहीं हो सकता है। प्रतियोगिताओं में जाने पर खुद के पैसे खर्च करने पड़ते हैं। कालेज से नाममात्र का ही पैसा मिलता है।
-सूरज राणा

- जितना कालेज में फंड होता है उसके हिसाब से ही खेल गतिविधियां कराई जाती हैं। कालेज से हर वर्ष टीमें खेलने जाती हैं। स्थायी क्रीड़ा अधिकारी नहीं होने से भी दिकतें होती हैं।
-डा. केएस नेगी, प्रभारी क्रीड़ा अधिकारी, महाविद्यालय कोटद्वार

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