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नुकसान की क्षतिपूर्ति की चिंता में किसान

Pauri Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
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कोटद्वार। बारिश न होने से बुवाई से छूटे खेतों को लेकर किसान परेशान हैं। कम बारिश के कारण फसल को जो नुकसान हुआ है, उसकी क्षतिपूर्ति किस तरह हो, ये चुनौती भी उनके सामने खड़ी है। इन स्थितियों के बीच, कृषि विभाग ने रोपाई से छूटे खेतों के लिए काश्तकारों को सुझाव दिए हैं। विभाग ने कहा है कि किसान तोरिया की फसल अगस्त और सितंबर महीने में लगा कर नुकसान से काफी बच सकते हैं।
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पर्याप्त बारिश नहीं होने से 20 से 25 प्रतिशत तक धान की खेती पर संकट गहराया है। जो 25 प्रतिशत तक गेहूं की फसल देर से बोई गई है, उसे लेकर भी दिक्कत है। उस फसल के पक कर तैयार होने तक गेहूं की फसल की बुवाई का समय आगे बढ़ जाएगा। इस प्रकार किसान को धान और गेहूं दोनों ही फसलों में नुकसान होना तय है। अगस्त का महीना शुरू होने के बाद से धान की बुवाई का समय लगभग समाप्त हो चुका है। अब अगर बुवाई की जाती है तो अगली फसल को ही नुकसान होगा। इससे किसान चिंतित हैं। पहाड़ के उन क्षेत्रों में जहां पर धान की जगह मंडुआ आदि की बुआई की जाती थी, वहां पर भी संकट की स्थिति है। वे फसलें या तो नष्ट हो चुकी हैं अथवा उनके खेतों में खर पतवार उग आए हैं। भाबर के किसानों ने 25 से 30 प्रतिशत तक विलंब से धान की फसल लगाई है। इससे उन्हें गेहूं की फसल लेने में दिक्कत होगी। जब धान की फसल तैयार हो जाएगी तभी गेहूं की फसल ली जा सकेगी।
भाबर के किसान माधव राम का कहना है कि विलंब से हुई बारिश के दौरान किसानों ने धान की फसल बोई तो जरूर, लेकिन उसे तैयार करने में काफी मेहनत होगी। वहीं क्षेत्र के किसान रामाश्रय प्रसाद का कहना है कि जो नुकसान हो गया उसकी पूर्ति तो सरकार भी नहीं कर सकती है।

-बारिश में विलंब का असर फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा। हालांकि विभाग ने इसका आकलन अभी नहीं किया है। फिर भी किसान जहां पर फसल नहीं बो पाए हैं वहां पर तोरिया आदि की फसल ले सकते हैं। इससे धान की फसल की प्रतिपूर्ति हो जाएगी। बाद में उस खेत में समय से गेहूं की फसल ली जा सकेगी।
-के लाल, उपनिदेशक, कृषि पौड़ी

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