हजारों लोगों पर भारी कंपनी की मनमानी

Pauri Updated Thu, 02 Aug 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। अलकनंदा पर निर्माणाधीन 330 मेगावाट जल विद्युत परियोजना के बैराज क्षेत्र में झील बनने से हजारों लोग दहशत में हैं, लेकिन अलकनंदा हाइड्रोपावर कंपनी मनमानी पर उतारू है। प्रशासन के लाख प्रयासों के बावजूद कंपनी ने बांध के सिर्फ दो गेट ही खोले हैं। जबकि डीएम सभी पांच गेटों को खोलने के आदेश दे चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि जलभराव होने के बाद कंपनी के प्रशासनिक अधिकारी यहां से गायब हो गए हैं।
झील का जलस्तर बुधवार शाम तक 585.6 मीटर बना हुआ था। इससे नदी से सटे गंडासू, धारी, डुंग्री पंथ सहित आधा दर्जन गांव खतरे की जद में हैं। धारी देवी मंदिर परिसर भी बार-बार जलमग्न हो रहा है। साथ ही श्रीनगर और श्रीकोट के निचले इलाकों पर भी संकट मंडरा रहा है। मंगलवार को बदरीनाथ हाईवे भी पानी में डूब गया था। झील का जलस्तर बार-बार बढ़ने से इन सभी इलाकों में लोग दहशत में हैं। नियमानुसार बिजली उत्पादन शुरू होने से पहले बांध के गेटों को बंद नहीं किया जा सकता। प्रशासन यह बात बार-बार दोहरा तो रहा है, लेकिन कंपनी कुछ सुनने को तैयार नहीं है।

- धारी देवी मंदिर परिक्षेत्र में लगातार जलभराव ने भक्तों की आवाजाही पर विराम लगा दिया है। धारा पांच लागू होने के बावजूद कंपनी द्वारा बैराज क्षेत्र के गेट बंद करने से ऐसा हुआ है। श्रीनगर तथा श्रीकोट के निचले क्षेत्र भी खतरे में हैं। - राकेश सिंह, धनेश्वरी देवी, अलकनंदा विहार, श्रीनगर

- स्थिति को देखते हुए कंपनी को बांध के सभी गेट खोल देने चाहिए। धारी देवी मंदिर तक बनी झील ने धारी गांव के लोगों का सुख-चैन छीन लिया है। गांव का पुनर्वास किए बिना कंपनी को इस तरह गेट बंद नहीं करने चाहिए थे। - अनूप जोशी, धारी गांव

क्रेन बचाने के लिए लोगों को डाल दिया संकट में
श्रीनगर। श्रीनगर परियोजना के बांध पर बनी झील बार-बार खतरनाक रूप ले रही है, लेकिन कंपनी बांध के गेट खोलने को क्यों तैयार नहीं है। यह सवाल इन दिनों हर व्यक्ति पूछ रहा है। सूत्रों का कहना है कि गेट नंबर एक के समक्ष लगी महंगी क्रेन को बचाने के लिए कंपनी इस गेट को नहीं खोल रही है। जबकि तीन अन्य गेटों को खोलने पर भी क्रेन के बर्बाद होने का डर है। निर्माणदायी कंपनी ने झील बन जाने के कारण करोड़ों के नुकसान होने की बात भी पहले दिन ही कही थी।

कंपनी के प्रशासनिक अधिकारी गायब
श्रीनगर। हैरानी की बात यह है कि स्थिति भयावह होने के बावजूद कंपनी के प्रशासनिक अधिकारी यहां मौजूद नहीं हैं। जलभराव होने के दूसरे दिन से ये अधिकारी यहां से गायब हैं। कंपनी निदेशक की गैर मौजूदगी में कंपनी समन्वयक प्रशासनिक कार्यों को देखते हैं, लेकिन वे भी नदारद हैं। ऐसे में कंपनी के इंजीनियर तथा अन्य अधिकारी इस मामले में कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।

- कंपनी समन्वयक संतोष रेड्डी कोर्ट संबंधी कार्यों से बाहर गए हैं। वे शीघ्र ही श्रीनगर पहुंचकर जलभराव की स्थिति पर अपना पक्ष रखेंगे।-वाईआर शर्मा, पीआरओ, अलकनंदा हाइड्रोपावर कंपनी
मां धारी के दर्शनों को तरसे भक्त
श्रीनगर। जल भराव के कारण शक्ति पीठ धारी मंदिर में भक्तों की आवाजाही पर विराम लग गया है। गत एक सप्ताह से भक्त मां के दर्शन नहीं कर पाए हैं। जलभराव के कारण यहां पहुंच रहे भक्तों को मंदिर परिसर से लगभग तीन सौ मीटर दूर से ही वापस लौटना पड़ रहा है। सामान्य दिनों में सिद्धपीठ धारी देवी मंदिर में हर रोज भक्तों का तांता लगा रहता है।

- कंपनी को सख्त निर्देश कर दिए गए हैं कि जलस्तर को 585 मीटर से अधिक न बढ़ने दिया जाए। कंपनी ने बताया है कि दो गेटों के दरवाजों पर हाइड्रोलिक सिस्टम नहीं है, जिससे दरवाजों को उठाया नहीं जा सकता। जबकि एक गेट के द्वार पर क्रेन होने के कारण उसे खोला नहीं जा सकता है।-चंद्रेश कुमार यादव, जिलाधिकारी, पौड़ी

Spotlight

Most Read

Lucknow

यूपी में नौकरियों का रास्ता खुला, अधीनस्‍थ सेवा चयन आयोग का हुआ गठन

सीएम योगी की मंजूरी के बाद सोमवार को मुख्यसचिव राजीव कुमार ने अधीनस्‍थ सेवा चयन बोर्ड का गठन कर दिया।

22 जनवरी 2018

Related Videos

देहरादून में हुआ शानदार कार्यक्रम, झूमते नजर आए आम लोग

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अखिल गढ़वाल सभा की ओर से परेड ग्राउड में उत्तराखंड महोत्सव ‘कौथिग’ में पांचवे दिन लोक गायकों के गीत का जादू लोगों के सर चढ़कर बोला। लोकगायक अनिल बिष्ट, संगीता ढौडियाल, कल्पना चौहान, हीरा सिंह राणा ने समा बांध दिया।

30 अक्टूबर 2017

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper