बिजली के लटकते तार, हादसे का इंतजार

Pauri Updated Thu, 02 Aug 2012 12:00 PM IST
यमकेश्वर। क्षेत्र में अनेक जगह लटकते बिजली के तार ऊर्जा निगम को दिखलाई नहीं दे रहे हैं। इन तारों से जान-माल का खतरा लगातार बना हुआ है, मगर ऊर्जा निगम सुध लेने को तैयार नहीं है। जयहरी मल्ली गांव में एक ग्रामीण का मवेशी तार की चपेट में आकर मौत का शिकार बन गया। उसे छुड़ाने के चक्कर में ग्रामीण को भी करंट लगा, मगर उसे बचा लिया गया। ग्रामीणों ने ऊर्जा निगम से इस मामले में अविलंब ठोस कार्रवाई की मांग की है।
क्षेत्र के कस्याली, भृगुखाल, जयहरी जैसे गांवों में कई जगह बिजली के तार लटक रहे हैं। ये लटकते हुए इतने करीब आ गए हैं कि किसी भी क्षण राह चलता इनकी चपेट में आ सकता है। मगर ऊर्जा निगम इस पर आंखें बंद किए हुए है। ब्लाक के जयहरी मल्ली गांव निवासी कल्याण सिंह का मवेशी सोमवार को इन तारों की चपेट में आकर मर गया। कल्याण सिंह को भी करंट लगा। इस घटना की जानकारी ऊर्जा निगम के कस्याली स्थित दफ्तर को दी गई। तब जाकर एक घंटे बाद बिजली बंद हुई। इस गांव में पिछले एक साल से बिजली की तार लटक रही है। बरसात के दिनों में खंभों में भी करंट आ रहा है। क्षेत्र पंचायत सदस्य अनीता देवी का कहना है कि क्षेत्र के अनेक गांवों में बिजली के तार लटक रहे हैं। राजकीय इंटर कालेज भृगुखाल के प्रांगण में आम और युकेलिप्टस के पेड़ों से होकर भी बिजली के तार गुजर रहे हैं, लेकिन कहने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे वहां पढ़ने वाले बच्चों को भी खतरा हो सकता है। इधर, ऊर्जा निगम के यमकेश्वर क्षेत्र के एसडीओ अमर सिंह का कहना है कि ग्रामीण के मवेशी का मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा जहां भी बिजली की तार लटक रही हैं, उन्हें तुरंत ठीक करा दिया जाएगा।

तीन ब्लाकों की बिजली एक जेई के हवाले
बैजरो। तीन विकास खंडों में बिजली की आपूर्ति की जिम्मेदारी एक कनिष्ठ अभियंता के ऊपर है। सामान्य स्थिति में एक विकास खंड की ही जिम्मेदारी संभालना इंजीनियर को भारी पड़ता है। ऐसे में समझा जा सकता है कि एक कनिष्ठ अभियंता किस तरह से तीन ब्लाकों को संभाल रहा होगा।
ऊर्जा निगम के कारनामे अजब हैं। जहां पर तीन एसडीओ तैनात होने चाहिए थे, वहां पर सिर्फ एक कनिष्ठ अभियंता के कंधों पर जिम्मेदारी सौंप दी गई है। तीन विकास खडों बीरोंखाल, नैनीडांडा और थलीसैंण के लिए विभाग ने एकमात्र कनिष्ठ अभियंता तैनात कर रखा है। बीरोंखाल के अंतर्गत स्यूंसी स्थित उपखंड में तैनात अभियंता ही अन्य दो जगह भी देख रहा है। इस वजह से जहां भी बिजली की दिक्कत पैदा होती है, उसे संभलने में अनावश्यक तौर पर बहुत ज्यादा समय लग जाता है। कनिष्ठ अभियंता का सारा समय तीनों जगह से संबंधित कागजी कार्रवाई निबटाने में ही निकल जा रहा है। इसके अलावा बैठकें, जनसमस्याएं सुनना आदि काम भी निपटाने में समय निकल रहा है।

21 हजार से अधिक हैं उपभोक्ता
-तीनों विकास खंडों में व्यावसायिक और घरेलू विद्युत कनेक्शन 21 हजार से अधिक हैं। सैकड़ों किमी लंबी लाइनें हैं। इनको मेंटेन करना अपने आप में एक चुनौती है। बरसात के समय जगह-जगह मार्ग टूटे रहते हैं। लाइनें क्षतिग्रस्त भी इसी समय होती हैं। उनको सही करने में भी काफी समय लग जाता है।

-यहां पर एक जगह से अभियंता का तबादला हो गया है और दूसरे सेवानिवृत्त हो गए है, इस कारण दो जगह खाली हो गई हैं। इनको प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा।-कन्हैया लाल मिश्रा, एसडीओ, कोटद्वार विद्युत निगम

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