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अब ना जागे तो झेलनी पड़ सकती है केदार से बड़ी त्रासदी: पद्म भूषण चंडी प्रसाद भट्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पौड़ी Updated Tue, 28 May 2019 08:53 AM IST
फाइल फोटो
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पर्यावरणविद् व पद्म भूषण चंडी प्रसाद भट्ट ने प्रदेश सरकार को सचेत होने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि हिमालय पृथ्वी का सबसे संवेदनशील क्षेत्र है। इस क्षेत्र में बिना प्रबंधन के विकास कार्य आगे बढ़ाना पूरे जीव जगत के लिए घातक हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार अब भी नहीं जागी तो हमें केदारनाथ त्रासदी से भी बड़ी त्रासदी झेलनी पड़ सकती है।
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रविवार को गढ़वाल विवि के बीजीआर परिसर पौड़ी में भूगोल विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार का शुभारंभ हुआ। इसमें पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने कहा कि पौड़ी से हिमालय का विहंगम दृश्य आलौकिक करने वाला है, लेकिन पौड़ी को विश्व मानचित्र पर नहीं उकेर पाना हमारी नाकामी को दर्शा रहा है। भट्ट ने कहा कि पहले ग्रामीण जंगल से जुड़े रहते थे, वर्तमान में सरकार ने ग्रामीणों को जंगल से जुदा कर दिया है। सरकार को वन संरक्षण में ग्रामीणों का सहयोग चाहिए, लेकिन वह ग्रामीणों को अधिकार नहीं देना चाहती है, जिससे हिमालयी क्षेत्र की पारिस्थितिकी में असंतुलन की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण एवं विकास में संतुलन होना आवश्यक है। मैती आंदोलन के प्रणेता कल्याण सिंह रावत ने कहा कि हिमालय क्षेत्र की पारिस्थितिकी से छेड़छाड़ हो रही है, जो हमें अनेक प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से सामना करा रहा है।

पर्यावरणविद् जगत सिंह चौधरी जंगली ने कहा कि पहाड़ में मिश्रित वनों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गढ़वाल विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि हिमालय हमारी जैव विविधता का परिचायक है। इसके संवर्द्धन, संरक्षण व पोषण के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। कार्यक्रम में तमिलनाडु, मिजोरम, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश व हरियाणा सहित अनेक प्रदेशों से भूगोलवेत्ता व पर्यावरणविद् शामिल हुए। सेमीनार का संयोजन पौड़ी परिसर के निदेशक प्रो. केसी पुरोहित, संचालन डा. प्रांजलि पुरोहित व आकृति पुरोहित ने किया। इस अवसर पर आयोजन सचिव डा. अनीता रुडोला, प्रो. वीपी सती, प्रो. बीसी वैद्य, प्रो. बीएल तैली, प्रो. एसजी वेंकट सुब्रमण्यम, प्रो. एसके बंसल, प्रो. एचपी भट्ट, प्रो. एमएसएस रावत, डा. बीपी नैथानी, डा. मोहन पंवार, डा. ईशान पुरोहित व प्रो. एके डोबरियाल आदि मौजूद थे।

पांच विभूतियों को किया सम्मानित
सेमीनार में पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने वाली पांच विभूतियों को सम्मानित किया गया। इनमें मैती आंदोलन के प्रणेता कल्याण सिंह रावत, जगत सिंह चौधरी जंगली, डा. विनोद भट्ट, कीर्ति नवानी और प्रो. पीपी बडोनी शामिल रहे।

जैव विविधता पर अलग हुई कार्यशाला
सेमीनार में जैव विविधता पर अलग कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें जैव विविधता बोर्ड उत्तराखंड की ओर से जानकारी प्रदान की गई। बोर्ड के कार्यों को भी लोगों के सामने रखा गया।

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