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नदी, झीलों, धारों में बचेगा, तो ही नल से टपकेगा.... पानी

ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Mon, 27 May 2019 01:47 AM IST
हल्द्वानी जल स्तर घटने के कारंण सूखी पड़ी गौला नदी
हल्द्वानी जल स्तर घटने के कारंण सूखी पड़ी गौला नदी - फोटो : अमर उजाला
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इन दिनों जल संरक्षण सप्ताह चल रहा है। पंपिंग योजनाओं, टैप वाटर के इस दौर में आम शहरी की पानी की चिंता नल के पानी से आगे नहीं बढ़ पाती। ऐसे में जल संरक्षण की मुहिम भी टैप वाटर को बरबाद न होने देने, भू जल के दोहन, बारिश के पानी के उपयोग से आगे नहीं बढ़ पा रही है। कुमाऊं विश्वविद्यालय के एक शोध के मुताबिक कुमाऊं में हर साल करीब पांच किलोमीटर जलधारा सूख रही है। इसी शोध में यह भी बताया गया है कि कुमाऊं में करीब 45 प्रतिशत प्राकृतिक जल स्रोत सूख गए हैं। यह धरातल पर दिख भी रहा है। नदियां, झील, तालाब, नौले अस्तित्व खोते जा रहे हैं। लबालब पानी वाली नदियां सूखती जा रही हैं। जहां पानी बचा भी है तो वह कम होता जा रहा है। जल संरक्षण की एक चिंता तेजी से घटते जा रहे जल स्रोतों को बचाने, संवारने और पुनर्जीवित करने की भी होनी चाहिए।
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सूख रही सहायक नदियां, दम तोड़ रही है कोसी
गरमपानी (नैनीताल)। एक जमाना था जब कोसी नदी पानी से लबालब रहती थी। अब नदी में पत्थर और डेल्टा दिखाई देे रहे हैं। कोसी नदी को अपनी सहायक विश्वनाथ, सरौता, कतियागाढ़, जैरासी गधेरा, चमड़ियानाला और शिप्रा नदी से भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। कोसी नदी में चौसली, मनरसा, नवोदय विद्यालय, जन्ता, लोहाली, ज्याड़ी, बड़ेरी एहल्सों, अमेल, कालाखेत की पंपिंग योजना संचालित हैं। इनमें कई योजनाएं सिंचाई के लिए बनी है।

रामनगर से रामपुर तक हो जाएगा पानी का संकट
रामनगर (नैनीताल)। कोसी के जलस्तर में इसी तरह कमी होती रही तो जल्द ही रामनगर से रामपुर तक के लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ेगा। यही कोसी है जो रामनगर समेत रामपुर तक के लोगों की लाइफ लाइन कही जाती है। इन दिनों नदी का जलस्तर गिरने से रामनगर और आसपास के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी हैं। सिंचाई विभाग के ईई कैलाश उनियाल ने बताया जनवरी, फरवरी और मार्च में बारिश न होने के कारण कोसी के जलस्तर में गिरावट आई है। कोसी नदी का पानी गंगा स्नान से पहले रामपुर तक दिया जाता है, लेकिन इस वर्ष पानी कम होने से यह संभव न हो सकेगा।

गौला भी प्यासी, सिंचाई के लिए पानी कहां से लाए
हल्द्वानी।  सिंचाई विभाग के गौला बैराज प्रभारी अवर अभियंता केएस बिष्ट ने बताया कि गौला का जलस्तर 26 मई को 78 क्यूसेक रिकार्ड किया गया। पेयजल के लिए पानी की आपूर्ति के बाद सिंचाई के लिए मात्र 48 क्यूसेक पानी बचा है जबकि रोजाना 106 क्यूसेक पानी की जरूरत है। पानी की कमी के कारण नहरों में चौथे दिन पानी छोड़ा जा रहा है।

शुक्र है, भीमताल झील का जलस्तर बढ़ा
भीमताल (नैनीताल)। भीमताल झील का जलस्तर पिछले वर्ष 2018 के सापेक्ष 5 फुट अधिक है। इस वर्ष झील का जलस्तर 40.1 फुट है। सिंचाई विभाग की जेई सुजाता हर्बोला ने बताया कि रविवार को भीमताल झील का जलस्तर 40.1 फुट था, जबकि 26 मई 2018 में झील का जलस्तर 35.6 फुट था। जेई ने बताया इस साल झील के जलस्तर में गिरावट नहीं आई है। हालांकि सिंचाई विभाग बिलासपुर के किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए पांच क्यूसेक पानी झील से छोड़ रहा है।

चिंता: सामान्य से अधिक घटा नैनी झील का जलस्तर
नैनीताल। नैनी झील का जलस्तर बीते तीन दिन में दो इंच घट गया है। इससे पहले प्रतिदिन औसतन आधा इंच जलस्तर घट रहा था। शुक्रवार, शनिवार और रविवार को जलस्तर में दो इंच गिरावट दर्ज की गई। तीन दिन में डेढ़ इंच जलस्तर गिरना चाहिए था लेकिन दो इंच गिर गया है। झील नियंत्रण कक्ष के सुपरवाइजर रमेश सिंह ने बताया कि जलस्तर अभी शून्य से एक फुट साढ़े नौ इंच ऊपर है। जल्द ही बारिश होने के आसार हैं। ऐसे में संभव है कि इस बार झील का जलस्तर शून्य से नीचे न जाए। यहां नैनी झील ही पेयजल का एक मात्र स्रोत है।

राहत भरी बारिश: देर से होगी, कम होगी
हल्द्वानी। उत्तराखंड में मानसून 28 जून को दस्तक देता है। इस बार मानसून आठ जुलाई तक आने की संभावना है। पंतनगर विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह का कहना है कि मानसून थोड़ा देर से आठ जुलाई तक उत्तराखंड में दस्तक देगा। उत्तराखंड में मानसून की बारिश सामान्य से पांच प्रतिशत तक कम हो सकती है। पांच प्रतिशत अधिक या कम बारिश को मौसम वैज्ञानिक सामान्य ही मानते हैं।

अभी और सताएगी गर्मी, तपिश करेगी बेहाल
हल्द्वानी। सूर्यदेव की तपिश बेहाल करने के साथ ही गर्मी भी अभी और सताएगी। पंतनगर विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने कहा कि 31 मई तक यह क्रम जारी रहेगा। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र की मानें तो पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की बारिश हो सकती है जबकि राज्य के शेष स्थानों में मौसम शुष्क रहेगा। रविवार को हल्द्वानी का अधिकतम तापमान 38.2 और न्यूनतम तापमान 19.0 डिग्री सेल्सियस रहा। अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस अधिक रहा जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री सेल्सियस कम रहा। मुक्तेश्वर में अधिकतम तापमान 24.2 और न्यूनतम तापमान 11.3 डिग्री सेल्सियस रहा। न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस कम रहा। नैनीताल का अधिकतम पारा 26 और न्यूनतम 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

कैसे मिले पानी, 29 आपरेटरों के भरोसे 196 नलकूप
हल्द्वानी। नलकूप खंड हल्द्वानी के अधीन 196 नलकूप हैं। नलकूपों की देखरेख और संचालन के लिए विभाग के पास वर्तमान में मात्र 29 आपरेटर हैं। डिवीजन में आपरेटरों के अलावा मिस्त्री, अवर अभियंता और सहायक अभियंताओं की भी कमी है। यही नहीं पूरे डिवीजन को चलाने के लिए एक पूर्णकालिक अधिशासी अभियंता तक नहीं है। रुद्रपुर डिवीजन के ईई को हल्द्वानी डिवीजन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। ऐसी स्थिति में नलकूपों का संचालन करना नलकूप खंड के लिए संभव नहीं हो रहा है। नलकूप खंड का कामकाज देख रहे रुद्रपुर डिवीजन के ईई गोकर्ण सिंह टोलिया ने बताया कि इस डिवीजन का गठन 1983 में किया गया। तब डिवीजन में नौ मिस्त्री, 40 नलकूप आपरेटर, 12 अवर अभियंता तीन सहायक अभियंता और एक ईई का पद सृजित किया गया। वर्तमान में 9 के सापेक्ष 4 मिस्त्री, 40 के सापेक्ष 29 आपरेटर, दो सहायक अभियंता और एक प्रभारी ईई हैं। आपरेटरों के 1999 से मृत घोषित कर दिए गए हैं। जिस वजह से प्रति वर्ष आपरेटरों की संख्या में कमी हो रही है और नए पद सृजित नहीं होने से भर्ती भी नहीं हो रही है। नलकूप खंड के 196 नलकूपों से क्षेत्र की 14070 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। इसके अलावा 127 नलकूपों से क्षेत्र की पेयजल सप्लाई की जाती है। ब्यूरो

पेयजल की समस्या को लेकर विधायक से मिले लोग
नैनीताल। देवीधुरा के ग्रामीण रविवार को पेयजल समस्या को लेकर विधायक संजीव आर्य से मिले। ग्रामीणों ने विधायक को ज्ञापन सौंप कर पेयजल की समस्या का निदान करने की मांग। वहां पर सुरेश चंद्र, राजेंद्र प्रसाद, प्रदीप कुमार, जितेंद्र कुमार, विपिन कुमार, कमला देवी, शीला आर्य आदि थे। ब्यूरो

कोसी नदी का पानी कब कितना हुआ
26 मई को 84 क्यूसेक
25 मई को 86 क्यूसेक
24 मई को 87 क्यूसेक
23 मई को 85 क्यूसेक
22 मई को 89 क्यूसेक

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