हिमाचल का सेब भाया, अपने को ठुकराया

Haldwani Bureauहल्द्वानी ब्यूरो Updated Fri, 14 Aug 2020 01:51 AM IST
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हल्द्वानी/नैनीताल/भीमताल। फल पट्टी के नाम से विख्यात रामगढ़ क्षेत्र में फल उत्पादकों को सेब का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। सालभर की मेहनत के बाद भी खरीदार न होने से किसानों को हल्द्वानी की मंडी में सेब का 30 से 40 रुपये प्रति किलो ही मूल्य मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश का सेब हल्द्वानी की बाजारों में 150 रुपये किलो बिक रहा है।
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यहां ज्यादा होता है अधिक उत्पादन
रामगढ़, धानाचूली, मुक्तेश्वर, नथुवाखान, सतबुंगा, धारी।
जिले में ये हैं सेब की प्रजातियां
डेलीसस, रायमर, रेड गोल्ड, किंग डेविड, फैनी, बिनौनी, अली, सेनवरी आदि।
कहां कितना है उत्पादन क्षेत्र
रकबा (हेक्टेयर) पैदावार (मैट्रिक टन)
भीमताल 0.90 2.70
धारी 511.29 4340
ओखलकांडा 41.22 350
रामगढ़ 675.57 3719
बेतालघाट 7.88 67.20
कोटाबाग 7.81 70.50
काश्तकार की पीड़ा
मंडी में 30 से 40 रुपये किलो तक ही सेब बिक रहा है जबकि हिमाचल का सेब 150 रुपये तक बिक रहा है। सेब का उचित मूल्य न मिलने से काश्तार परेशान हैं। -भुवन दरमवाल, सेब काश्तकार, रामगढ़
हमारा सेब मंडी में 40 रुपये किलो तक बिक रहा है जबकि हिमाचल का सेब 100 से 150 रुपये किलो तक बिक रहा है। रामगढ़ क्षेत्र के सेब का मूल्य गिरने से किसान परेशान हैं। -हरेंद्र सिंह बिष्ट, सेब काश्तकार, रामगढ़
दाम न मिलने के कारण
1. पहाड़ के सेब की पुरानी वैरायटी है।
2. हिमाचल का सेब बेदाग और साफ सुथरा है।
ऐसा हो सकता है
1. पुराने बागों में परंपरागत पेड़ों की जगह नई वैरायटी के सेब के पेड़ लगाने चाहिए।
2. कम समय में फल देने वाली प्रजातियों के बारे में काश्तकारों को बताया जाना चाहिए।
अपनी-अपनी बात
पहाड़ के सेब की पुरानी वैरायटी और सेब में दाग होने से उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है जबकि हिमाचल का सेब नई वैरायटी का होने के साथ बेदाग और साफ सुथरा होने से बाजार में अच्छे दाम पर बिक रहा है। काश्तकारों को सेब की नई और कम समय में फल देने वाली प्रजातियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। -भावना जोशी, जिला उद्यान अधिकारी
फोटो
फल पट्टी में उत्तम गुणवत्ता के सेब के पौधे लगाने के लिए प्रदेश सरकार को योजना बनानी चाहिए। सरकार को अगर अर्थव्यवस्था को सुधारना है तो उत्तराखंड में बागबानी आंदोलन विकसित करना पड़ेगा।
- जीवन सिंह कार्की अध्यक्ष, आलू फल आढ़ती व्यापारी एसोसिएशन
काश्तकारों से यह सेब एग्रो फैक्ट्री भी लेती थी जो कि बंद पड़ी है, इस वजह से भी यहां के सेब की खपत नहीं हो पा रही है। सरकार की ओर से सेब को खरीदने के लिए ठोस नीति बननी चाहिए।
- मनोज साह अध्यक्ष, मंडी समिति
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