पिथौरागढ़ को एक सर्वोच्च पद, दो पद्मश्री

Nainital Updated Sun, 26 Jan 2014 05:53 AM IST
हल्द्वानी/पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिले के सपूतों ने एक बार फिर उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है। जिले को एक सर्वोच्च पद और दो पदमश्री सम्मान मिला है। धारचूला के गर्ब्यांग गांव के एसएस गर्ब्याल को डीजी फॉरेस्ट की जिम्मेदारी मिली है। वहीं, केंद्र सरकार ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कार्यरत धारचूला के तिरांग गांव के डा. जीवन सिंह तितियाल को चिकित्सा क्षेत्र और मुनस्यारी के बोना गांव के लवराज को एवरेस्ट फतह करने पर पदमश्री सम्मान देने की घोषणा की है।
एसएस गर्ब्याल उत्तराखंड बनने के बाद राज्य के पहले वनाधिकारी है जो डीजी फॉरेस्ट पद पर पहुंचे हैं। इससे पूर्व एकीकृत उत्तर प्रदेश में एनडी बचखेती, एसके पांडे, एनके जोशी एवं जेसी काला ने भी इस पद को सुशोभित किया था। फोन पर अमर उजाला से बातचीत में श्री गर्ब्याल ने बताया कि उन्होंने हाईस्कूल-इंटर की पढ़ाई धारचूला में की। इसके बाद बीएससी डीसीबी परिसर नैनीताल और एमएससी चंडीगढ़ से किया। वह 1977 में आईएफएस बने। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड समेत देश के दूसरे हिस्सों में भी मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या है जिसे कम करने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा जंगल संरक्षण के लिए भी नई योजनाएं बनाई जाएंगी।
फोन से बातचीत में धारचूला के तिरांग निवासी डा. जीवन सिंह तितियाल ने बताया कि उन्होंने हाईस्कूल धारचूला और इंटर लखनऊ से किया। इसके बाद उनका चयन एम्स में एमबीबीएस (1983) के लिए हो गया। उन्होंने एम्स से ही एमडी (आप्था) का कोर्स पूरा करने के बाद अपनी सेवाएं शुरू की। वर्तमान में वह एम्स के अंतर्गत आने वाले डा. राजेंद्र प्रसाद नेत्र संस्थान के कार्निया यूनिट के विभागाध्यक्ष पद पर सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कार्निया ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। वह राज्य के पहले व्यक्ति हैं, जिन्हें मेडिसिन के क्षेत्र में पद्मश्री मिलेगा। डा. तितियाल का कहना है कि मेडिकल कालेज हल्द्वानी से चिकित्सा, शोध कार्य में और सहयोग बढ़ाया जाएगा। उनके भाई प्रो. गोविंद सिंह तितियाल मेडिकल कालेज हल्द्वानी में नेत्र रोग विभाग में सेवा दे रहे हैं।
मुनस्यारी के बोना गांव निवासी पर्वतारोही लवराज सिंह धर्मशक्तू को भी पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। बीएसएफ में सहायक कमांडेंट के पद पर देहरादून में तैनात लवराज को शनिवार को ही केंद्रीय गृह मंत्रालय से इसकी सूचना मिली है। 41 वर्षीय लवराज 16 वर्ष की उम्र से ही पर्वतारोहण अभियानों से जुड़ गए थे। उन्होंने पांच बार एवरेस्ट फतह किया। वर्ष 2013 में वह एवरेस्ट अंतरराष्ट्रीय अभियान दल के लीडर भी रह चुके हैं। लवराज ने सबसे पहले 1998 में एवरेस्ट फतह किया। 2008 में लवराज ने कंचनजंघा के अलावा कॉमेट, नंदाघूंटी समेत सभी चोटियों पर फतह की है। उनकी पत्नी रीना कौशल धर्मशक्तू भी पर्वतारोही हैं। वह साउथ पोल तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला हैं।

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