तीन मौतें, मुआवजा दो को, जिम्मेदार कोई नहीं

Nainital Updated Sat, 25 Jan 2014 05:53 AM IST
हल्द्वानी। सात दिन के भीतर एक परिवार में तीन मौतें हो गईं और इसका जिम्मेदार कोई नहीं। दो बच्चे अनाथ हो गए और एक बाप ने दो संतानें खो दी, इसके बावजूद सप्ताहभर में बिजली विभाग ने गठित की केवल जांच कमेटी। अधिकारी कहते हैं कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तय होगा कि कितना मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजा मिलेगा भी तो केवल दो को। करंट से झुलसकर मरी चंद्रा के पेट में सात महीने के गर्भ की कोई कीमत नहीं। इसके अलावा इन मौतों के लिए किसी पर कार्रवाई होगी इसका भी स्पष्ट जवाब किसी के पास नहीं। सबसे हैरानी की बात यह है कि तीन लोगों की मौत के बाद मुख्य अभियंता कुमाऊं कहते हैं कि इस मामले में कंसलटेंट अफसर से बात करो।
भीमताल के सरना गांव की चंद्रा देवी 17 जनवरी को खेत में झूलते बिजली के तारों की चपेट में आ गई थी। चंद्रा को बचाते हुए उसकी बेटी रेखा की मौके पर मौत हो गई। 23 जनवरी को एसटीएच में उपचार के दौरान चंद्रा ने भी दम तोड़ दिया। चंद्रा के पेट में सात महीने का गर्भ था और बिजली विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही ने एक साथ तीन लोगों की जान ली। तीन जानें चली गई, लेकिन बिजली विभाग के अफसर अब तक केवल एक जांच कमेटी गठित कर पाए। कमेटी में तीन लोगों को रखा गया है, इसमें ईई परीक्षण खंड, एई मीटर और एक एसडीओ शामिल हैं। एसई एचके गुुरुरानी कहते हैं कि कमेटी को 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। जांच के बाद तय होगा कि मरने वाले मुआवजे के दायरे में आते हैं या नहीं। मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी या नहीं इसका किसी के पास स्पष्ट जवाब नहीं।
ईई नैनीताल शेखर त्रिपाठी कहते हैं कि नियम के मुताबिक दो लोगों को मुआवजा मिलेगा। मरने वाले चंद्रा और रेखा को, जबकि करंट से हुए इस हादसे में तीन लोगों की जान गई है। सात महीने के गर्भ की बिजली विभाग के लिए कोई कीमत नहीं। इधर, अधिवक्ता बसंत जोशी कहते हैं कि इस मामले में तीन लोगों का मुआवजा मिलना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता तो दो लोगों को मिलने वाले मुआवजे का पैसा बढ़ाया जाना चाहिए।

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