कुत्ते के लिए छोड़ रखा है घरबार

Nainital Updated Wed, 22 Jan 2014 05:52 AM IST
हल्द्वानी। ऐसे दौर में जब इंसान की कोई कीमत न हो तब कोई इंसान कुत्ते के लिए कीमती आंसू बहाए तो ध्यान जाना स्वाभाविक है। आश्चर्य और अधिक बढ़ जाता है जब पता चलता है कि वह कुत्ते के खातिर घरबार छोड़े पड़ा है। उसकी जिंदगी बचाने के लिए वह इतने आगे निकल आया है कि जीवन साथी भी करीब 100 किमी पीछे छूट गई है। अब वह दो चिंताओं के साथ रातभर अपने कुत्ते की देखरेख करता। शायद यही असल प्रेम है। समाज को सीख देने वाला यह काम एक शिक्षक करता है यह जानकर एहसास होता है कि शिक्षक शब्द के मायने कितने बड़े हो सकते हैं।
राजेंद्र कुमार जूनियर हाईस्कूल जाड़ापानी में सहायक अध्यापक हैं और मूलरूप से पहाड़पानी के चौंरलेख गांव के रहने वाले हैं। मास्साब का बचपन गांव में बीता इसलिए उन्हें हमेशा जानवरों से लगाव रहा और एक कुत्ता सदा उनके जीवन का हिस्सा रहा। तीन साल पहले ही उनकी जिंदगी में टाइगर (कुत्ता) आया था। मास्साब के बच्चे हल्द्वानी में रहते हैं जबकि वह अपनी पत्नी और टाइगर के साथ चौंरलेख में। अपने बच्चों से दूर होने के कारण तीन साल से टाइगर की गुर्राहट ही उन्हें बच्चों की मौजूदगी का अहसास दिलाती आई है। लेकिन 13 जनवरी की रात एकाएक यह गुर्राहट शांत हो गई और टाइगर पस्त पड़ गया।
इसके बाद से ही मास्साब ने ठीक ढंग से खाना नहीं खाया। 13 की पूरी रात घरेलू उपचार के बाद जब टाइगर को यूरिन नहीं हुई तो मास्साब की चिंता बढ़ गई। उन्होंने तड़के ही प्रधानाचार्य को फोन कर स्कूल से छुट्टी ली और एक जीप किराये पर लेकर टाइगर को हल्द्वानी ले आए। यहां निजी चिकित्सालय में राय मिली की टाइगर को पंतनगर पशु चिकित्सालय ले जाएं। इसके बाद फिर मास्साब ने जीप बुक की और पंतनगर रवाना हो गए। 15 जनवरी को टाइगर का आपरेशन हुआ और मास्साब उसे लेकर हल्द्वानी अपने बच्चों के पास आ गए। मास्साब के पिता सुंदर लाल बताते हैं कि जब से टाइगर बीमार हुआ है उनके बेटे ने न सही से खाया और न सोया है। बस कुत्ते के पास ही बैठा रहता है। इसके बावजूद टाइगर है कि न खड़ा होता है न भौंकता है बस मास्साब को देखकर रोता रहता है।
अपने आंसू रोकने में नाकाम मास्साब कहते हैं कि एक तरफ बर्फ से ढके चौंरलेख में अकेली पत्नी की चिंता उन्हें सताती है और दूसरी तरफ टाइगर है कि पास से हिलते ही रोना शुरू कर देता है। सोमवार को उनकी चिंता तब और अधिक बढ़ जाती है जब पंतनगर पशु चिकित्सालय के डाक्टर उनका फोन नहीं उठाते। घर वाले रोकने की कोशिश करते है लेकिन मास्साब उसे पंतनगर ले जाने की जिद पर अड़े रहते हैं। अकेले ही जीप किराये पर लाते हैं अपने टाइगर को उठाते हैं और जीप में रखकर यह कहते हुए रवाना हो जाते हैं कि मैं कल तक इसका दर्द नहीं देख सकता।

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