छह साल से नहीं रुक रही हिचकी

Nainital Updated Mon, 20 Jan 2014 05:53 AM IST
हल्द्वानी। भारत भले ही दुनिया में सबसे सस्ता इलाज मुहैया कराने वाले देशों की श्रेणी में शुमार हो गया है, लेकिन सटीक और हर बीमारी का इलाज अब भी हमारे पास नहीं है। चीन ने भले ही माथे पर नाक बनाकर अपने नागरिकों को बचाया हो, लेकिन अपने यहां एक हिचकी का इलाज पिछले छह साल में नहीं हो पाया। जगदीश चंद्र लोहनी इसका उदाहरण हैं। श्री लोहनी को छह साल से लगातार हिचकियां आ रही हैं। हिचकी के इलाज के लिए उन्होंने हल्द्वानी के सभी अस्पताल छानने के बाद दिल्ली-बरेली एक कर दिए लेकिन हिचकी है कि रुकती ही नहीं। उनकी यह बीमारी बड़े-बडे डॉक्टरों के लिए भी चुनौती बनी हुई है।
आपको जब हिचकी आती है तो केवल एक मिनट में ही इसे रोकने के लिए क्या-क्या जतन नहीं कर लेते? हिचकी नहीं रुकी तो बेचैनी बढ़ने लगती है। मूलरूप से ताकुला (बागेश्वर) के रहने वाले और वर्तमान में हल्द्वानी के पीपलपोखरा में रह रहे पूर्व सैनिक जगदीश चंद्र लोहनी इस बेचैनी के साथ छह सालों से जी रहे हैं। हिचकी के कारण वह न कहीं जा पाते हैं, न सही से खा पाते हैं और न नींद आती है। सोने के लिए भी छह-छह नींद की गोलियां खानी पड़ती हैं।
श्री लोहनी बताते हैं कि 2008 में उनके पैर पर चोट लग गई। वह हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में गए तो डॉक्टर ने हाथ पर इंजेक्शन लगाया। इससे हाथ भी खराब हो गया। हाथ के ऑपरेशन की जरूरत पड़ी और ऑपरेशन से पहले डॉक्टर ने उन्हें गोली दी। गोली खाने के बाद से ही हिचकी की शुरुआत हुई और आज छह साल हो गए। हल्द्वानी के सभी अस्पतालों ने जवाब दे दिया। दिल्ली सहित देश में सेना के जितने भी बड़े अस्पताल हैं दिखाया लेकिन हिचकी नहीं रुकी। श्री लोहनी बताते हैं कि अब तक इलाज में करीब तीन लाख रुपए फूंक चुके हैं। हां पिछले कुछ सालों से महीने में औसतन चार दिन हिचकी जरूर रुक जाती है। यही दिन उनकी जिंदगी के सबसे बेहतरीन होते हैं।

किडनी में खराबी और पेट में इरिटेशन है हिचकी का कारण
सुशीला तिवारी अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डा. वैभव पुच्छल कहते हैं कि सभी लोगों के पेट में तेजाब बनता है, यह जब पेट में ऊपर को आता है तो हिचकियां आती हैं। किडनी की समस्या के कारण भी हिचकियां आती हैं। हम कह सकते हैं कि पेट में इरिटेशन के कारण ऐसा होता है। कुछ लोग हिचकियां रोकने के लिए चीनी और नमक खाते हैं, लेकिन इससे हिचकी नहीं रुकती। ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर नवीन कांडपाल कहते हैं कि छाती और पेट को अलग करने वाले डायक्राम से जुड़ी पैरेनिक नसों में गड़बड़ी आने के कारण हिचकियां आती हैं।

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