‘जिले’ के बोझ से दबी सरोवर नगरी

Nainital Updated Sat, 23 Nov 2013 05:45 AM IST
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हल्द्वानी। खटीमा को जिला बनाने का प्रस्ताव शासन के पास जाने की सुगबुगाहट के बाद कुमाऊं के सबसे बड़े शहर हल्द्वानी की उपेक्षा का सवाल फिर उठने लगा है। यह हल्द्वानी की अनदेखी की ही बात नहीं, नैनीताल पर दबाव कम करने की भी जरूरत है। नैनीताल में करीब 60 हजार की आबादी पर मंडल के तमाम अधिकारी हैं, जबकि करीब 3.50 लाख की आबादी वाला हल्द्वानी सिटी मजिस्ट्रेट के भरोसे चलता है। आलम यह है कि कुमाऊं का मेडिकल हब हल्द्वानी और जिले के सीएमओ नैनीताल में। यही हाल बिजली-पानी और शिक्षा जैसे विभागों का भी है। जरूरत के अनुसार अधिकारी नैनीताल से नीचे नहीं उतरना चाहते या फिर उन्हें उतारा क्यों नहीं जाता यह एक सवाल है?
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कुछ कार्यालयों को छोड़ दें तो नैनीताल में कई ऐसे अफसर बैठे हैं, जिन्हें तार्किक रूप से हल्द्वानी में होना चाहिए। मसलन, सह निदेशक उद्योग, आरएम स्टेट ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन, अपर निदेशक स्वास्थ्य, मुख्य अभियंता (जल संस्थान), मुख्य अभियंता (पावर कारपोरेशन), मुख्य वन संरक्षक जैसे कार्यालय नैनीताल पर सिर्फ दबाव बढ़ा रहे हैं, जबकि इनकी जरूरत हल्द्वानी में है। सह निदेशक उद्योग नैनीताल में बैठकर कितने उद्योगों पर नजर रखते होंगे, यह वहां उद्योगों की गिनती से पता चलता है। सारे अस्पताल हल्द्वानी में और अपर निदेशक स्वास्थ्य नैनीताल में, यह बात भी समझ से परे है। इसके अलावा बिजली की पूरी सप्लाई हल्द्वानी से और मुख्य अभियंता बैठते हैं नैनीताल में। इसके अलावा कई विभाग जनसंख्या के आधार पर हल्द्वानी में होने चाहिए। इन अफसरों के विशाल कैंप कार्यालय भी हल्द्वानी में बने हैं। नैनीताल में 60 हजार की आबादी पर कमिश्नर, जिलाधिकारी, डीआईजी और एसएसपी हैं, जबकि हल्द्वानी में 3.50 लाख लोगों को देखने के लिए केवल इनके कैंप कार्यालय हैं। जबकि यहां स्थायी कार्यालय बनाकर नैनीताल को मुक्त भी किया जा सकता है। इसके अलावा जीएम जल संस्थान, एसई आरईएस, एसई पीडब्लूडी, जिला संचार अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी आदि हैं, जिन्हें नैनीताल से नीचे उतारा जा सकता है। इन विभागों को नीचे उतारकर इनसे संबंधित कामों के लिए रोज नैनीताल के चक्कर लगाने वालों का बोझ भी हम सरोवर नगरी से कम कर सकेंगे। वहीं, हल्द्वानी में दफ्तर खुलने के कई फायदे लोगों को होंगे। हल्द्वानी कुमाऊं की सबसे बड़ी मंडी है। इस वजह से यहां जिले भर से लोगों का आना-जाना रहता है। स्वास्थ्य सुविधाएं भी हल्द्वानी के स्तर की कुमाऊं में कहीं नहीं है। इन कामों के लिए जिले के ही नहीं कुमाऊं के लोग हल्द्वानी आते हैं। यदि मंडल के कार्यालय हल्द्वानी में होंगे तो लोग नैनीताल की दौड़ से बच सकेंगे।
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