जंगल ही नहीं धरोहर भी बचा रहा जंगलात

Nainital Updated Thu, 21 Nov 2013 05:45 AM IST
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हल्द्वानी। जंगलात केवल वन ही नहीं बल्कि धरोहर भी बचा रहा है। 134 साल पहले नंधौर के घने में वन में ब्रिटिश सरकार ने सुरक्षा को चौकी बनाई थी, जो आज भी जंगल बचाने में काम मददगार बन रही है। ऐसे कई एतिहासिक इमारतों को जंगलात ने संरक्षित करने के साथ मूलस्वरूप बनाए रखा।
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जंगल बचाने के लिए प्रभागों की स्थापना हुई थी, उसमें सबसे पुराने प्रभागों में हल्द्वानी डिवीजन है। यह प्रभाग बाघ, हाथी के अलावा दूसरे वन्यजीवों और वन संपदा से भरपूर रहा है। इसकी सुरक्षा तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत ने 1879 में आंवलाखेड़ा में चौकी बनाई, जहां आज भी पहुंचना दुष्कर है। यहीं पर बाद में 1906 में दूसरे रेस्ट हाउस का भी निर्माण किया गया। बीहड़ कहे जाने वाले दुर्गापीपल जहां छह महीने रास्ता कटा रहता है, वहां पर भी 1916 रेस्ट हाउस बनाया गया। इसी तरह जौलासाल में 1918 में रेस्ट हाउस का निर्माण किया गया। उप प्रभागीय वनाधिकारी प्रकाश आर्य कहते हैं कि यह रेस्ट हाउस, चौकियां सौ साल से ज्यादा वक्त की है, इन एतिहासिक भवनों का इस्तेमाल आज भी सफलतापूर्वक जंगल बचाने में किया जा रहा है। जंगलात को अगर मरम्मत भी करनी होती है, तो उसके मूलस्वरूप से कोई भी बदलाव नहीं किया जाता है। लगातार अधिकारियों के दौरे, देखभाल से इनकी मजबूती बनी हुई है। इसी तरह तिकोनिया, पवलगढ़, नंधौर, किशनपुर और किलबरी को रेस्ट हाउस भी एतिहासिक है।
पर्यटन को भी बढ़ावा फोटो 19 पीटीएच 7 पी
पिथौरागढ़। जंगलात के रेस्ट हाउस पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मददगार बने हुए हैं। पिथौरागढ़ में वन विभाग का डाक बंगला 55 वर्ष पहले बना था। चंडाक रोड पर सड़क से हटकर एक टापू पर बने इस डाकबंगले के आसपास चीड़ और देवदार के जंगल हैं। यहां शहर का कोलाहल नहीं है। शहर का पूरा विहंगम नजारा आप देख सकते हैं। डाकबंगले के चौकीदार चंद्र सिंह पानू का कहना है कि यहां पर महीने में कम से कम 20 दिन लोग आते हैं। जाड़ों तथा गर्मियों में भीड़ ज्यादा रहती है। वह कहते हैं कि जो एक बार इस डाकबंगले में टिक जाता है वह दुबारा जरूर आता है। डाकबंगले कक्षों के बाहर पहाड़ की दुर्लभ जड़ीबूटियों के नाम लिखे गए हैं। एक कक्ष का नाम थुनेर है और दूसरे का नाम तानसेन है। वन रेंजर बीएस अलमिया कहते हैं कि यह दोनों बहुउपयोगी जड़ीबूटियां हैं। इनके बारे में लोग जानना चाहते हैं।
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