जंगल की जमीन पर होटल का रास्ता

Nainital Updated Thu, 24 Oct 2013 05:43 AM IST
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हल्द्वानी। फारेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एफटीआई) के गेट-2 के पास जंगल की जमीन पर एक निर्माणाधीन होटल का रास्ता बना लिया गया है। साफ तौर वन विभाग की सीमा बताने वाले पीलर लगे होने के बावजूद यह रास्ता बना दिया गया है। इस पर जंगलात ने होटल मालिक को नोटिस दिया है। हालांकि, होटल मालिक कथित तौर इसे अपनी जमीन बता रहा है। वहीं, मेडिकल कालेज द्वारा कैंसर इंस्टीट्यूट में अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है, जबकि जंगलात की टीम ने क्रियाशाला के पीछे वन निगम द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण को रुकवाने के साथ ही सामग्री भी जब्त कर ली है।
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करीब तीन साल पहले एफटीआई की जमीन पर प्रशासन की शह पर कब्जा हुआ था, जिसे तराई केंद्रीय वन प्रभाग की टीम ने तत्कालीन डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते के निर्देशन में बमुश्किल हटाया। बाद में नैनीताल डीएम को हटाया गया था, मामला सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल इंपवार्ड कमेटी में भी गया था। बाद में जंगल की सीमा को लेकर विवाद न हो, इसे लेकर जंगलात ने सीमा दर्शाने वाले खंभों को नवीनीकरण कराया। इसी के तहत खंभे रामपुर रोड और एफटीआई गेट-2 के पास भी लगा है। यहीं से सटी जमीन पर एक होटल का निर्माण हो रहा है। इस होटल के गेट का रास्ता जंगल की जमीन से निकाला गया है, जबकि स्पष्ट तौर पर वहां पीलर दिखाई दे रहा है। अब जब रास्ता तैयार हो गया है तब जंगलात की नींद टूटी है। उसने होटल मालिक को नोटिस दिया है। वन क्षेत्राधिकारी सीएल आर्य का कहना है कि पहले हमारी जमीन पर झोपड़ी जैसा कच्चा निर्माण किया गया था, जिसे हटाया गया। अब रास्ता बनाया गया है। हमने होटल मालिक को नोटिस दिया है, अगर तीन दिन में जवाब नहीं दिया, तो रास्ता ध्वस्त करने के साथ दूसरी वैधानिक कार्रवाई होगी। होटल मालिक का दावा है कि जमीन राजस्व की है, जिसे वैधानिक तौर पर खरीदा गया है। इसके अभिलेख आदि का भी परीक्षण होगा।
वहीं, मेडिकल कालेज द्वारा लगातार अवैध निर्माण जारी है। मेडिकल कालेज को जंगलात की भूमि का हस्तांतरण नहीं हुआ है, पर नियम कानून को ताक पर रखकर कैंसर इंस्टीट्यूट से लेकर एसटीएच में भी निर्माण हो रहा है। इसके अलावा वन निगम ने भी क्रियाशाला के पीछे की जमीन पर निर्माण शुरू कर दिया। पता चलने पर जंगलात के होश उड़ गए। आनन-फानन में निर्माण बंद कराने के साथ सामग्री जब्त कर ली गई है। वनाधिकारियों के अनुसार इस संबंध में वन निगम के अधिकारियों से भी बात की गई, तो उन्हें भी पूरी जानकारी नहीं है।
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