तेल बचाने के चक्कर में हुआ हादसा

Nainital Updated Tue, 22 Oct 2013 05:43 AM IST
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हल्द्वानी। नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग पर हुए कैंटर हादसे की जांच में प्रारंभिक कारण कैंटर को न्यूट्रल में चलाना और ढाल पर अनियंत्रित हो जाना माना जा रहा है। वहीं परिवहन विभाग की टीम ने कैंटर के संबंध में जेपी नगर परिवहन कार्यालय से कागजात भी मांगे हैं। जांच टीम का कहना है कि चालक के थोड़ा सा तेल बचाने के लिए कैंटर को न्यूट्रल में चलाना ही हादसे का बड़ा कारण बना।
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कैंटर हादसे के बाद आरटीओ ने तकनीकी जांच के आदेश दिए थे। इसमें एआरटीओ प्रवर्तन डा. गुरदेव सिंह और फोरमैन श्रीपाल के निर्देशन में गठित टीम ने सोमवार को मौके पर जाकर निरीक्षण किया। अधिकारियों के मुताबिक हादसे का कारण कैंटर को न्यूट्रल में चलाना है। एआरटीओ सिंह कहते हैं कि न्यूट्रल में चलाने और ढाल होने से कैंटर अनियंत्रित हो गया। चालक ने ब्रेक लगाकर वाहन को काबू करने की कोशिश की है, जिसके निशान मौके पर भी मिले हैं। आरटीओ एसके सिंह कहते हैं कि हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मिल गई है। बाकी वाहन के कागजात आदि की जांच कराई जा रही है।
अपराध है न्यूट्रल पर वाहन चलाना
आरटीओ सिंह कहते हैं कि पहाड़ की ढाल पर न्यूट्रल कर वाहन चलाना अपराध है। अगर वाहन को न्यूट्रल कर दिया जाता है तो गेयर जो एक तरह से स्वचालित ब्र्रेकिंग सिस्टम का काम करता है, वह खत्म हो जाता है। पूरा दारोमदार ब्रेक पर होता है, जो कई बार पूरी तरह वाहन को काबू करने में असफल भी हो जाता है। उन्होंने बताया कि गाड़ी को न्यूट्रल में चलाने पर पकड़े जाने पर अधिकतम 1000 रुपये तक जुर्माने का नियम है। इधर, आरआई दिनेश पांडे कहते हैं कि वाहन चलता है तो उसकी गति इंजन से तय होती है। लेकिन जब न्यूट्रल कर वाहन लाया जाता है तो वाहन की स्पीड ढाल पर निर्भर करती है। वाहन चढ़ाते-उतारते समय लोअर गेयर पर चलाना चाहिए।



सवालों के घेरे में माल वाहनों का नियम
हल्द्वानी। माल वाहनों का नियम सवालों के घेरे में है। परिवहन विभाग के नियमानुसार माल ढुलाई करने वाले वाहनों में सवारी नहीं ढोई जा सकती है। लेकिन पुलिस, पीएसी से लेकर कैदियों को ले जाने वाले वाहनों का स्ट्रक्चर भी ट्रक (रजिस्ट्रेशन भी ट्रक में होता) का होता है, जिसमें जवानों और कैदियों को लाया-ले जाया जाता है। वहीं मूवमेंट के समय अधिकारी दूसरे छोटे वाहनों में होते हैं यानी एक तरह से इनकी सुरक्षा को लेकर भी खिलवाड़ किया जाता है। परिवहन अधिकारी इसका बचाव उत्तराखंड मोटर वाहन नियमावली के उपबंध(102) के तहत करते हैं, जिसमें अस्पष्ट तौर पर ऐसे वाहनों को विशेष छूट देने की बात कही गई है। सवाल यह है कि क्या हुक्मरान और निजाम के लिए कानून अलग-अलग हैं।

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