कानून से बड़ी होती है समाज की ‘सजा’

Nainital Updated Tue, 22 Oct 2013 05:43 AM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
कालाढूंगी। अफरोज, फिरोज, फैजान और फिरदौस। चारों जब हंसते हैं तो आंगन चहकता है। बच्चे उस ज्योति की तरह हैं जिनके उजाले से परिवार बनता है, पलता है और बढ़ता है लेकिन इस नन्ही उम्र में इन चारों को पिता के गुस्सैल रवैये की सजा मिली है। मां परवीन घायल हालत में एसटीएच हल्द्वानी में पड़ी है तो पिता कानून की कस्टडी में है। हंसते चेहरों को हमारे कानून ने नहीं सामाजिक तानेबाने ने मुरझाया है। उन्हें चिंता है कि अगर हमारा ‘आज’ इतना हिंसक है तो इसे अपने साथ लेकर समाज का सामना कैसे करेंगे।
विज्ञापन

पिता का फर्ज याद करने के बजाए एक पति का पत्नी पर आक्रामक होकर इस बेरहमी से वार करना विकृत होते जा रहे समाज का आइना है। जफर की सबसे बड़ी लड़की है 11 साल की अफरोज। उसके बाद तीन बेटे 8 वर्षीय फिरोज, 5 साल का फैजान और 3 साल का फिरदौस हैं। अब तक इन्हें जफर ने काशीपुर रखा था और दस दिन पहले ही यहां कमरा लेकर रहने लगा। बच्चों को यहीं स्कूल में दाखिला दिलवाना था। जफर का इतना हिंसक रूप बच्चों ने पहले कभी नहीं देखा। माला से निकल रहे मोतियों की तरह परिवार का धागा कमजोर पड़ता देख यह बच्चे एक दिन से नहीं कई दिनों से देख रहे हैं, झेल रहे हैं।
आज जब मां अस्पताल और पिता कस्टडी में हैं तो बच्चों के सामने यक्ष प्रश्न खड़ा हुआ है। अपने वर्तमान का, अपने भविष्य का और उस भविष्य के आगे-आगे चलने वाले इस हिंसक अतीत का। सुबह से चारों बच्चे भूखे रहे। जफर के मकान मालिक जाहिद हुसैन ने फिलहाल बच्चों को अपने पास रखा है, लेकिन कब तक ये शरणार्थी बनकर रहेंगे। क्योंकि इस उम्र में इन्हें मां और पिता दोनों चाहिए। एक अवसादग्रस्त परिवार में अब ये बच्चे अकेले हैं। इंतजार है कि कैसे भी मां-पिता लौटकर आ जाते और हमारा भी परिवार खुशी से चलता। समाजशास्त्री मानते हैं कि समाज में इस तरह की घटनाओं का नई पीढ़ी पर प्रतिकूल प्रभाव पढ़ता है। बचपन अगर ऐसा हो बच्चे कुंठित होने लगते हैं और इसीलिए बचपन बिगड़ता है।
जफर की हरकतें अजीबोगरीब
कालाढूंगी। पत्नी पर हमला करने की घटना में जफर को पुलिस ने इसलिए भी मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया है, क्योंकि वह इससे पूर्व भी अजीबोगरीब हरकतें कर चुका है। थानाध्यक्ष दिनेश चंद्र पंत का कहना है कि एक हफ्ता पहले वह गड़प्पू चौकी में था और वहां उसे बिस्तर में आग लगा दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us