हरिया ने दिया जल, जंगल और जमीन बचाने का संदेश

Nainital Updated Mon, 28 Jan 2013 05:30 AM IST
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हल्द्वानी। भारत सरकार के संस्कृति विभाग और शैलनेट संस्था के सहयोग से मेडिकल कालेज सभागार में कुमाऊंनी लोककथा पर आधारित नाटक हरिया बैल का मंचन किया गया। हरिया बैल ने पहाड़ के जल, जंगल और जमीन को लेकर चल रहे संघर्ष को दर्शकों के सामने रखा। हरिया ने कैसे इन्हें बचाया जाए, उसका संदेश कुशलता के साथ दिया। कलाकारों ने जीवंत अभिनय से खूब ताली और सराहना बटोरी।
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हरिया बैल कुमाऊंनी परंपरा पर आधारित एक लोक कथा है। इस कथा में हरिया एक पात्र है, जिस के सिर पर सींग उगे होने के कारण सामाजिक उपहास के डर से चाचा उसे जंगल में छोड़ आता है, जहां से एक पतरौल उस बच्चे को दूसरे गांव के मंदिर के पास छोड़ आता है। हरिया पर सींग होने के कारण लोग उसे हरिया बैल कहते हैं। 20 साल बाद हरिया फिर उसी गांव में वापस आता है और जल, जंगल और जमीन को लेकर संघर्ष करता है और गांव की बुराईयों के खिलाफ लड़ाई छेड़ता है। जिसके विरोध में उसके पिता ही सामने आते हैं। अंत में वह लोगों को सामाजिक विसंगतियों और छिपे हुए षड्यंतों को समझाने में सफल होता है। नाटक का निर्देशन अहसान बख्श ने किया। इसमें धनश्याम भट्ट, रोहित मेलकानी, केदार पलड़िया, राजीव पांडेय, आकाश नेगी, अंकुर जैसवार, किशोर पंत, जुगल किशोर जैसे कलाकारों ने अपने मंचन से लोगों की ताल बटोरी। प्राचार्य डा. आरसी पुरोहित ने कहा कि थियेटर लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में आयोजित किए जाते रहेंगे।

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