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महिला पुलिस बढ़ाओ, सख्त कानून लाओ

Nainital Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
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हल्द्वानी। दिल्ली की घटना ने सभी को झकझोर दिया है। लड़कियों का मानना है कि दावे चाहे कितने भी किए जाएं सुरक्षा और व्यवस्था दोनों ढीली हैं। लड़कियों से जुड़े मामलों में अब शासन-प्रशासन को संवेदनशीलता दिखानी होगी। केवल आश्वासनों से बात नहीं बनेगी। जरूरी है हर जिले में एक महिला थाना खोेला जाए। पुलिस में महिलाओं की संख्या बढ़ाई जाए। जिन जगह पर लड़कियों से जुड़े संस्थान है वहां पर केवल दिखावे के लिए नहीं बल्कि वास्तविक रूप से पुलिस बल तैनात हो। लड़कियां का मानना है कि जिस तरह से संगठित अपराध से निपटने के लिए महाराष्ट्र में मकोका जैसे कानून बनाए गए हैं। इसी तरह से महिलाओं से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए कानून बने। जल्द न्याय के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित की जाएं।
महिला महाविद्यालय हल्द्वानी की अध्यक्ष कविता बिष्ट कहती हैं कि सबसे पहले सामज के एक बड़े हिस्से की सोच बदलनी होगी। अपराध के लिए पीड़ित महिला को भी दोषी बताने वाली प्रवृति बदलनी पड़ेगी। उपाध्यक्ष कोमल भंडारी के अनुसार दिल्ली में जो घटना हुई है वह सीधे सरकार से जुड़ा हुआ मामला है। सरकार का रुख अपराधियों के लिए नरम रहा है।
कोषाध्यक्ष भावना राठौर का कहना है आज दिल्ली में दो ही महिलाएं सुरक्षित हैं सोनिया गांधी और शिला दीक्षित। आम महिला के लिए सुरक्षा के कोई मानक नहीं हैं। दीपिका पांडे कहती हैं कि कानून बनाने से ही नहीं उसे व्यवहार में भी उतराना होगा। चित्रा रौतेला कहती हैं कि स्कूलों- कालेजों के बाहर महिला पुलिस कर्मी तैनात किए जाने चाहिए। रेखा मटियाली कहती है कि महिला अपराधों की शिकायतों पर उचित कार्यवाई न करने वाले अधिकारियों पर कानूनी कार्यवाई की जानी चाहिए। देर रात सफर करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। कालेज परिसरों पर फूहड़ कार्यक्रमों के आयोजन प्रतिबंधित हो। गरिमा राने का कहना है कि ऐसे दरिंदों को जिंदा जला देना चाहिए।
शिवानी मेहता के अनुसार हैवानों को चौराहे पर फांसी की सजा दे देनी चाहिए। सुभद्रा सिंह स्त्री-पुरुष से ज्यादा इंसानियत मायने रखती है। दूसरे के साथ दुष्कर्म से पहले यदि इंसान खुद के बारे में सोचे तो ऐसा कुकर्म नहीं हो सकता है। गीता तिवारी का कहना है कि लड़कियां को जोड़ो कराटे का प्रशिक्षण दिया जाए। मुनमुन मटिलीया कहती है कि लड़कियों के लिए विशेष कानून होना चाहिए। पुष्पा का कहना है कि यदि महिलाओं से जुड़े अपराधों को रोकना है तो हर जिले में महिला थाना खोला जाए। पुलिस बलों में महिलाओं की संख्या बढ़ाई जाए।

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