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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के सहारे चल रहा जेडी दफ्तर

Nainital Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
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हल्द्वानी। आईटीआई के कुमाऊं मंडल का संयुक्त निदेशक कार्यालय इस समय केवल एक चतुर्थश्रेणी कर्मचारी के सहारे चल रहा है। इस दफ्तर में अब न कोई बाबू है और न ही कोई अफसर। कामचलाऊ व्यवस्था के तहत इस कार्यालय के संयुक्त निदेशक का कार्यभार आईटीआई के प्रधानाचार्य के पास है। प्रशिक्षण एवं सेवायोजन विभाग भी इस अव्यवस्था को लेकर बेखबर बना हुआ है।
मालूम हो कि कुमाऊं मंडल के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) पर प्रशासनिक नियंत्रण के मकसद से प्रशिक्षण एवं सेवायोजन विभाग ने वर्ष 1957 में यहां हल्द्वानी में संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण एवं शिशिक्षु) दफ्तर की स्थापना की थी। संयुक्त निदेशक को मंडल की आईटीआई के प्रधानाचार्यों की सीआर लिखने के साथ उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करने का अधिकार था तथा कर्मचारियों के विभागीय मामलों का निस्तारण भी इस दफ्तर के माध्यम से होता था। प्रशिक्षणरत छात्रों के मेडिकल एवं उनकी छुट्टियों का निस्तारण और परीक्षाएं भी इसी दफ्तर से संचालित होती थीं। लेकिन राज्य गठन के बाद यह दफ्तर विभाग की उपेक्षा का शिकार हो गया। तत्कालीन संयुक्त निदेशक अनंत राम सिंह के वर्ष 2006 में रिटायर होने के बाद किसी अफसर की विभाग ने तैनाती ही नहीं की। दफ्तर में स्टाफ के नाम पर एकमात्र बचे मुख्य सहायक भगवती प्रसाद जोशी भी पिछले साल रिटायर हो चुके हैं। जेडी के बाद मुख्य सहायक के रिटायर होने के बाद अब इस दफ्तर में न कोई बाबू ही है और न कोई अफसर ही। दफ्तर के स्टाफ के नाम पर सिर्फ एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही शेष बचा है। संयुक्त निदेशक का काम देख रहे आईटीआई (युवक) के प्रधानाचार्य जेएम नेगी कहते हैं कि इस दफ्तर का अधिकांश काम निदेशालय से होता है इसलिए इस कार्यालय का अब ज्यादा कोई महत्व नहीं रहा।

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